- राघव गुप्ता निवासी बुराड़ी, नई दिल्ली
- यसप्रीत सिंह निवासी देहरादून
- लोकेश गिभगली निवासी देहरादून
- करनजीत सिंह निवासी देहरादून
- पुरुषोत्तम कुमार निवासी मधुबनी, बिहार
- देव अरोड़ा निवासी देहरादून
- हर्ष गांगुली निवासी देहरादून
- दृष्यत गुलाटी निवासी नई दिल्ली
- अब्दुल समी निवासी देहरादून
- प्रोफुल मनी निवासी देहरादून
- तरुण अग्रवाल निवासी देहरादून
इनकी शह पर चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली निवासी नितिन गुप्ता, उदित गर्ग और गर्भित अपनी पहुंच का हवाला देते हुए कॉल सेंटर संचालित करवा रहे थे। बताया जाता है कि इन लोगों ने संचालकों से कहा था कि वे कभी पुलिस के छापे नहीं पड़ने देंगे। इसके लिए वे अच्छी-खासी रकम भी इन लोगों से ले रहे थे। हालांकि, अभी एसटीएफ ने इन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया है। कहा जा रहा है कि इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है।
बड़ा सवाल, कहां से आया इतना पैसा
कॉल सेंटर में सारा काम ऑनलाइन ही होता था। जाहिर है कि विदेशों से पैसा भी ऑनलाइन ही आता था। ऐसे में यह पैसा कहां से आया, इसके लिए उन्होंने अभी एसटीएफ को कोई वाजिब जवाब नहीं दिया है। पहले माना जा रहा था कि यह पैसा सैलरी आदि देने के लिए भी लाया जा सकता है। हालांकि, इस बीच पता चला कि यह डॉलर के बदले लिया गया पैसा है। इसके लिए एसटीएफ कुछ करेंसी एक्सचेंज सेंटर से भी जानकारी जुटा रही है। सारा पैसा एक दिन में निकाला गया या फिर कई दिनों में, इसकी भी जांच की जा रही है।