पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह साइबर अपराधियों को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड व सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। इसके बदले उसे मोटा आर्थिक लाभ मिलता था। आरोपी ने अपने नाम और अन्य व्यक्तियों के करीब 12 बैंक खाते खुलवाए थे। साथ ही "गाजी इंटरप्राइजेज" के नाम से फर्जी फर्म बनाकर कई बैंकों में खाते भी खोले थे। इन खातों में साइबर ठगी की रकम आने के बाद वह चेक और एटीएम के जरिए नकदी निकालकर गिरोह तक पहुंचाता था।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 11.95 लाख रुपये पहले आईडीबीआई बैंक खाते में पहुंचे, जिन्हें बाद में इंडसइंड बैंक और सेंट्रल बैंक के खातों में स्थानांतरित किया गया। इनमें से करीब सात लाख रुपये चेक के माध्यम से और शेष राशि एटीएम से निकाली गई।
एसटीएफ ने आरोपी के कब्जे से एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के दो डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन और विभिन्न कंपनियों के तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है और मामले में आगे की जांच जारी है।