उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्ध को त्रासदी बताया और मारे जा रहे लोगों के प्रति सहानुभूति भी जताई। साथ ही कुछ पंक्तियों से पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी बताया। सरताज ने एक प्यार का नगमा है... गीत गाया तो लोगों ने भी उनका खूब साथ दिया। उनके पंजाबी गीतों पर लोग देर रात तक झूमते रहे। प्रसिद्ध गीत सबसे मंहगी होंदी है मासूमियत... पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। दिल सकून वाला नहीं कठोर हो गया... गीत ने लोगों को भावुक भी कर दिया।
उनके भावपूर्ण शब्द, गहरी संवेदना और शास्त्रीय संगीत की झलक ने श्रोताओं को एक अलग ही अनुभव कराया। कार्यक्रम को लेकर युवाओं से लेकर सभी संगीत प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला।
श्री दरबार साहिब में टेका मत्था
गायक सतिंदर सरताज अपने कार्यक्रम के लिए शनिवार को ही दून पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले श्री दरबार साहिब में मत्था टेका। इस दौरान उन्होंने श्री दरबार साहिब में बनी कलाकृतियों को भी देखा।