सरकारी कर्मियों की मिलीभगत की भी होगी जांच
जांच का मुख्य केंद्र अब वह सिंडिकेट है जिसने जिला कार्यालय के रिकॉर्ड में इस फर्जी लाइसेंस की एंट्री कराई। माना जा रहा है कि बिना विभागीय मिलीभगत के कागजी रिकॉर्ड में हेरफेर संभव नहीं है। एसटीएफ अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में सरकारी दफ्तरों के किन कर्मचारियों की मिलीभगत थी। एसटीएफ ने आशंका जताई है कि उत्तराखंड के अन्य जनपदों में भी इस तरह के कई अपराधियों ने फर्जी लाइसेंस के दम पर हथियार जमा कर रखे हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जाएगी। जिलाधिकारी कार्यालयों की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराए गए फर्जी लाइसेंस व संलिप्त व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
दूसरे जिलों व राज्यों के लाइसेंस वहां के डीएम की एनओसी के बाद होते हैं दर्ज : डीएम
दूसरे जिलों और राज्यों से ट्रांसफर होने वाले इस तरह के लाइसेंस संबंधित जिलाधिकारी की एनओसी और स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किए जाते हैं। इस मामले में किस स्तर की चूक हुई है, यह देखा जाएगा। फिलहाल पुलिस की ओर से लिखित रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस से जो रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-सविन बंसल, जिलाधिकारी