डीआईजी गढ़वाल के जांच के आदेश का ऐसा हश्र होगा आदेश देते वक्त यह खुद तत्कालीन डीआईजी संजय गुंज्याल ने भी नहीं सोचा होगा।
पढ़ें, अगवा शुभम के साथ 21 को ही हो गई थी अनहोनी
रेव पार्टी में आईपीएस के होने और राजपुर थाना क्षेत्र से करोड़ों रुपए बरामद होने के मामलों की जांच के आदेश हुए थे। लेकिन आरटीआई के तहत ली गई सूचना में अभी तक डीआईजी को ही नहीं पता कि जांच का आखिर हुआ क्या।
एसएसपी को दो मामलों की जांच सौंपी
दिसम्बर 2012 में तत्कालीन डीआईजी संजय गुंज्याल ने एसएसपी देहरादून को दो मामलों की जांच सौंपी। एक साल बीतने के बाद भी डीआईजी कार्यालय को नहीं पता कि जांच का हश्र क्या हुआ।
राजपुर थाना क्षेत्र में रुपए मिलने की घटना 11 सितम्बर 2012 की थीं लेकिन इसके आदेश भी दिसम्बर में हुए। घटना के समय देहरादून की एसएसपी नीरू गर्ग थी लेकिन जांच के आदेश के समय केवल खुराना की तैनाती हो चुकी थी।
पढ़ें, जॉन अब्राहम को देखा और कर दिया आविष्कार
रेव पार्टी में आईपीएस की जांच भी लटकी है। मजे की बात यह है कि डीआईजी कार्यालय से सूचना मांगी तो उन्होंने यह पत्र जिला पुलिस के लोक सूचना अधिकारी (एसपी ग्रामीण) को भेजकर इतिश्री कर ली।
और एसपी ग्रामीण ने इस पत्र को एसओ राजपुर की तरफ सरका दिया। जबकि आदेश यह थे कि जांच राजपत्रित अधिकारी से कराई जाए।
इन दोनों मामलों की होनी थीं जांच
राजपुर थाना क्षेत्र में रुपयो की पेटी बरामद होना
11.09.2012 को एक गाड़ी से बरामद पेटी को थाने में सीओ के समक्ष खोला गया जिसमें बड़ी मात्रा में रुपए बरामद हुए।
03 दिसम्बर को तत्कालीन डीआईजी संजय गुंज्याल ने एसएसपी देहरादून को लिखित आदेश में कहा था कि कितना पैसा था, पैसे कहां से आया, जोहड़ी गांव में क्यो रखा गया। राजपत्रित अधिकारी से जांच कराई जाएं।
रेव पार्टी में आईपीएस अधिकारी के होने का मामला
04 दिसम्बर 2012 को तत्कालीन डीआईजी ने एसएसपी देहरादून को निर्देशित किया कि मीडिया में आई इस खबर पर जांच की जाए कि जाखन के पास पकड़ी गई रेव पार्टी में कथित तौर पर कौन आईपीएस शामिल था। इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए।
(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेंट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)