देहरादून में नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्था पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। बीते तीन माह पहले क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र के एक नशा मुक्ति केेंद्र से 17 युवक भाग गए थे। उन्होंने अपने परिजनों को बताया था कि केंद्र में उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता था। वहां पर डॉक्टरी सुविधा नहीं थी। उल्टे केंद्र के कर्मचारी उनके साथ मारपीट करते थे। इसके कुछ दिन बाद ही एक नशा मुक्ति केंद्र से कुछ युवतियां भी भाग गई थीं। इनमें से एक युवती ने संचालक पर दुष्कर्म, मारपीट करने और केंद्र में जबरन नशा कराने का आरोप लगाया था। केंद्र की वार्डन व संचालिका पर भी मारपीट का आरोप लगा था। इस मामले में पुलिस ने दोनों संचालकों को गिरफ्तार किया था।
अधिकतर में नहीं है कोई इलाज की सुविधा
पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग व अन्य अधिकारियों ने प्रेमनगर और इसके आसपास के नशा मुक्ति केंद्रों में जांच की थी। इस दौरान पता चला कि ज्यादातर में ट्रेंड स्टाफ भी नहीं था। वहां पर इंजेक्शन भी आठवीं पास लड़की लगाती थी। न वहां पर कोई डॉक्टर आता था और न ही अन्य प्रकार की कोई सुविधा थी। इस मामले में सभी नशा मुक्ति केंद्रों को नोटिस भेजा गया था। जिलाधिकारी ने भी एक नशा मुक्ति केंद्र के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। विभागों को तो यहां तक नहीं पता कि इन नशा मुक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है। यह केवल सोसाइटी बनाकर संचालित किए जाते हैं।