कॉल सेंटर से माध्यम से विदेशों में रहने वाले बुजुर्गों, दिव्यांगों, सेना से रिटायर अधिकारियों, कर्मचारियों से ठगी की जाती थी। कॉल सेंटर कर्मी इन लोगों को झांसा देकर सोशल सेक्योरिटी नंबर (जैसे भारत में आधार कार्ड) प्राप्त करते थे। इसके बाद इसके आधार पर वह उनका व्यक्तिगत विवरण पता, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण, व्यवसाय की जानकारी हासिल करते थे।
इसके बाद इन लोगों को इंटरनेट से कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी, लॉ एनफोरसमेंट एजेंसी का अधिकारी बताकर अलग-अलग तरीके से धमकाते थे। जैसे उनके काम को अवैध बताना, उनके अकाउंट का अवैध हथियारों, नशे की तस्करी जैसे गैरकानूनी कामों से संबंध होना। लोगों को जेल जाने, बैंक खाता सीज होने का डर दिखाकर वसूली की जाती थी। साथ ही गिफ्ट और बीमा पॉलिसी के नाम पर भी लोगों से ठगी की जाती थी। यह रकम डॉलर में मिलती थी, जो हर महीने कई करोड़ रुपये होती थी।
भारत में नहीं थी कोई शिकायत
ठगी और धोखाधड़ी का शिकार लोग विदेश में शिकायत करते थे। भारत में कोई शिकायत नहीं होने के कारण इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती थी। यह कॉल सेंटर रात को ही संचालित होता है, क्योंकि उस समय अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में दिन होता है।
टीम को बीस हजार का इनाम
फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करने वाली टीम को डीजीपी अशोक कुमार ने बीस हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने दूर संचार विभाग की टीम की प्रशंसा करते हुए उन्हें सम्मानित करने की भी घोषणा की है।
आरोपियों ने दिल्ली में रहने वाले कॉल सेंटर से जुड़े कंपनी के दूसरे साथियों के बारे में जानकारी दी है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। मामले में बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है।
-अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ।