इसके अलावा कृषि टर्म लोन बिना मार्जिन मनी के स्वीकृत किए गए। इसे केसीसी के माध्यम से समायोजित कर पूरी राशि डीलर के खाते में ट्रांसफर कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दिनकर ने मोहम्मद फुरकान, इरशाद हुसैन, अजीत सिंह, मंगल सिंह और श्याम सुंदर सिंह के साथ साजिश कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर ऋण स्वीकृत और वितरित किए। इससे बैंक को 55.48 लाख रुपये का और नुकसान हुआ। इस मामले में मोहम्मद फुरकान, इरशाद हुसैन और अजीत सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया जिससे उन्हें अलग से दोषी ठहराया गया।
मंगल सिंह की मृत्यु हो गई थी जिससे उसका केस बंद हो गया। इस मुकदमे में सीबीआई ने कुल 36 गवाह पेश किए। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी रामवतार सिंह दिनकर को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। जबकि, किसान श्याम सुंदर सिंह को एक साल कारावास की सजा हुई है।