विकासनगर क्षेत्र में 400 बीघा जमीन पर पेड़ काटकर की गई अवैध प्लॉटिंग के मामले में तीन डीएफओ और कई पीसीएस अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। पीसीएस अफसर 2007 से 2014 की अवधि में दून घाटी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (साडा) के सचिव पद पर और राज्य वन सेवा के तीनों अधिकारी कालसी के डीएफओ पद पर कार्यरत रहे हैं। इनमें कुछ अधिकारियों का कार्यकाल लंबा रहा जबकि कुछ ने महज कुछ दिनों के लिए ही पद संभाला था।
एसआईटी जांच के बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है। जिस अवधि का यह मामला बताया जा रहा है उस दौरान कई पीसीएस अफसर साडा सचिव के दौर पर कार्यरत रहे। इनमें प्रमुख तौर पर झरना कमठान, चंद्र सिंह धर्मशक्तू, नरेंद्र कुड़ियाल, गिरीश चंद्र गुणवंत, बंशीधर तिवारी और सुंदर लाल सेमवाल शामिल रहे हैं।
वहीं, राज्य वन सेवा (पीएफएस) के अ धिकारी एमएस पाल, लक्ष्मण सिंह रावत और रामगोपाल वर्मा बतौर प्रभागीय वनाधिकारी कालसी में तैनात रहे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने तत्कालीन साडा सचिव से कई बार मामले की शिकायत की लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा उन्होंने तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी कालसी और जिला उद्यान अधिकारी पर भी भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
अधिकारियों को लेकर होती रही चर्चा
विकासनगर मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद एमडीडीए में अधिकारियों के नाम को लेकर चर्चा होती रही। पहले साडा और एमडीडीए अलग-अलग प्राधिकरण थे, जिनको कुछ समय पहले ही मर्ज किया गया है। अधिकारी-कर्मचारी उस समय तैनात रहे अधिकारियों के संबंध में जानकारी जुटाते रहे। वहीं, संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं होती रही।