बिल्डर को अधूरी दुकानों का निर्माण दो माह में पूरा कर ग्राहक को कब्जा देना होगा। कब्जा देने तक करीब साढ़े नौ फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान भी करना होगा। ब्याज की रकम दुकानों की कुल कीमत की धनराशि में समायोजित की जाएगी। पूर्व चीफ कमिश्नर की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मामले में सुनवाई करते हुए रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने यह आदेश जारी किए हैं।
बीएस सिंह चीफ कमिश्नर, इनकम टैक्स के पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने सालावाला में पेंटा रियाल्टर्स की निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजना दून वन में तीन दुकानें खरीदने के लिए बिल्डर राजेंद्र अग्रवाल से इकरारनामा किया था। दिसंबर 2017 में किए गए इकरारनामा के मुताबिक उन्होंने 2600 वर्ग फीट कवर्ड एरिया की दुकानों के लिए दो करोड़ 10 लाख रुपये में से डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि भी चेक के जरिये भुगतान कर दी। हालांकि तय समय तक बिल्डर ने काम पूरा कर दुकानों पर कब्जा नहीं दिया।
दूसरी ओर बीएन सिंह ने दुकानों की माप कराई तो कुल कवर्ड एरिया 1801 वर्ग फीट ही निकला। इस पर बीएन सिंह ने बिल्डर राजेंद्र अग्रवाल के खिलाफ रेरा में वाद दर्ज कराया। माप की स्थिति स्पष्ट न होने पर रेरा के तकनीकी अधिकारी सर्वेश मित्तल ने दुकानों की नपाई की तो कवर्ड एरिया 2274 वर्ग फीट मिला।
इस पर रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने बिल्डर को एमडीडीए की कंपाउंडिंग योजना के मुताबिक दो माह के भीतर दुकानों का काम पूरा कर कब्जा देने के निर्देश दिए। उन्होंने अप्रैल 2018 से कब्जा देने तक कुल 9.55 फीसदी की दर से ब्याज लगाने के निर्देश भी दिए, जो बची हुई रकम 60 लाख में समायोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कवर्ड एरिया कम होता है, जो इसकी कीमत घटा दी जाएगी। दुकानों की फिनिशिंग अगर बीएन सिंह कराएंगे तो वे कीमत में पांच लाख रुपये और कम कर सकते हैं।