दून नारी निकेतन के बहुचर्चित संवासिनी शारीरिक शोषण प्रकरण में पुलिस ने शनिवार को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
चार्जशीट में करीब 40 गवाह बनाए गए हैं। नारी निकेतन की तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल समेत नौ लोगों के खिलाफ वैज्ञानिक और मेडिकल आधारित पुख्ता साक्ष्य जुटाए गए हैं। नारी निकेतन मामले में नेहरू कालोनी पुलिस ने 64 दिन की विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल की है।
संवासिनी से रेप और गर्भपात के मामले की रिपोर्ट 27 नवंबर 2015 को दर्ज होने के बाद विवेचना शुरू हुई थी। एक-एक कर आरोपियों को चिह्नित करने के साथ उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए गए। विवेचक कविता जोशी ने 28 नवंबर को चार्जशीट तैयार कर अनुमोदन के लिए एसपी सिटी अजय सिंह को सौंपी।
परीक्षण के बाद एसपी सिटी आफिस से शनिवार सुबह चार्जशीट अभियोजन के माध्यम से कोर्ट को भेज दी गई। विवेचना के दौरान 46 पर्चे काटे गए हैं, जिनमें साक्ष्यों को प्रकरण की हर कड़ी से जोड़ा गया है। विवेचना में मेडिकल साक्ष्यों के बाद वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन पर सबसे ज्यादा जोर रहा।
मेडिकल आधार पर पहले संवासिनी के गर्भपात की पुष्टि के बाद दूधली गांव के जंगल से बरामद भ्रूण का डीएनए मिलान कराया गया। पीड़िता के 164 के बयान के साथ नारी निकेतन के तीन कर्मचारियों को सरकारी गवाह बनाते हुए कोर्ट में उनके बयान कलमबंद कराए गए हैं।
डीएनए मिलान के माध्यम से यह साबित किया गया कि भ्रूण सफाई कर्मचारी गुरदास का है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने मामले में 40 के करीब गवाह बनाए हैं।
नारी निकेतन मामले में पांच महिला कर्मचारियों समेत नौ के खिलाफ साक्ष्यों का संकलन करने के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई है।
- अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर
इनके खिलाफ चार्जशीट
केयर टेकर हाशिम, होमगार्ड ललित बिष्ट की गिरफ्तारी संवासिनी का शारीरिक शोषण करने के आरोप में हुई है। नर्स किरण नौटियाल निवासी मंदाकिनी एंकलेव, क्राफ्ट टीचर शमा निगार निवासी शेखुपरा बनारस, चंद्रकला क्षेत्री निवासी राजपुर और संविदा कर्मी कृष्ण कांत उर्फ कांछा पर गर्भपात और साक्ष्य मिटाने के आरोप हैं। तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल और अनिता मंदोला की गिरफ्तारी भी साक्ष्यों को मिटाने पर हुई। भ्रूण से डीएनए मिलान की रिपोर्ट के बाद सफाई कर्मचारी गुरुदास का चेहरा बेनकाब हो सका।