नाजिया ने कहा कि उनका आवास टर्नर रोड पर है। लेकिन उन्हें अपने घर जाने का समय नहीं मिलता। वह पूरा दिन इन्हीं लड़कियों के बीच में रहती हैं। उनके रहने, खाने व शिक्षा का ध्यान रखती हैं। ये सभी बेटियां उन्हें मां का दर्जा देती हैं और मां कहकर पुकारती हैं।
ऐसे मिली प्रेरणा
नाजिया ने कहा कि संस्था गठन से पहले वह महिला हेल्पलाइन में काउंसलर के तौर पर सेवाएं देती थी। इस दौरान कई केस आते थे जिनमें महिलाओं को घर से निकाल दिया जाता था। उनके रहने के लिए कोई सुविधा नहीं होती थी। इसके बाद से उन्होंने महिलाओं को आश्रय देने का काम किया। लेकिन, इसके कुछ साल बाद उन्होंने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की ठानी। नाजिया ने कहा कि अगर बेटी शिक्षित एवं काबिल होंगी तो भविष्य स्वयं सुरक्षित रहेगा।
इनका है सहयोग
नाजिया ने कहा कि संस्था के गठन में सहकारिता विभाग में अधिकारी रमिंद्री मंद्रवाल ने मुख्य सहयोग किया। उनके अलावा मो. इलियास, आरएस नेगी, डॉ. शिव सिंह पाल, डॉ. आरएस चौहान, रानू राणा, सुनील उनियाल, विजय कार्की आदि।