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माई सिटी हीरो: जो कभी पहचान से महरूम थीं, नाजिया की पहल से उन बेटियों को मिला ‘अपना घर’

Sun, 12 Jan 2020 12:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 13 सालों से गरीब बेटियों का भविष्य बनाने में जुटी। 
  • रहने के साथ, शिक्षा का भी रखा जाता है ध्यान, हुनर भी हो रहा विकसित।
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नाजिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जो कभी पहचान से महरूम थी, आज उन बेटियों को ‘अपना घर’ मिल गया है। वो भी अब सपने देखनेे लगी हैं और उसे साकार करने का जज्बा दिखा रही हैं। इन सपनों को उड़ान देने का काम कर रही हैं देहरादून की नाजिया हुसैन खान। वह इन बच्चियों को रहने के साथ-साथ ही शिक्षा भी दे रही हैं। साथ ही कौशल तलाशकर उन्हें निखारा भी जा रहा है।

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बदरीपुर स्थित ‘अपना घर’ संस्था में इन बच्चियों के रहने की व्यवस्था की है। संस्था की संस्थापक सदस्य नाजिया ने कहा कि 13 साल से वह इन बच्चियों की सेवा कर रही हैं। इनमें सभी लड़कियां अनाथ, निराश्रित और निर्धन वर्ग की हैं। इनकी आयु छह से 18 वर्ष के बीच की है। यहां पर बच्चियां लाने पर उन्हें काउंसिलिंग दी जाती है।
 

उसके बाद उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाता है। यदि कोई लड़की कभी स्कूल नहीं गई तो उसे पहले कुछ साल तक यहीं शुरुआती शिक्षा दी जाती है। उसका शिक्षा का स्तर सुधरने के बाद उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाते हैं। संस्था बनने से पहले वह अकेले इस मिशन में जुटी थी, लेकिन इसके बाद कई लोगों के मार्गदर्शन एवं सहयोग से अपना घर नामक संस्था का गठन किया। 

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‘लड़कियां पुकारती हैं मां’

नाजिया ने कहा कि उनका आवास टर्नर रोड पर है। लेकिन उन्हें अपने घर जाने का समय नहीं मिलता। वह पूरा दिन इन्हीं लड़कियों के बीच में रहती हैं। उनके रहने, खाने व शिक्षा का ध्यान रखती हैं। ये सभी बेटियां उन्हें मां का दर्जा देती हैं और मां कहकर पुकारती हैं। 

ऐसे मिली प्रेरणा
नाजिया ने कहा कि संस्था गठन से पहले वह महिला हेल्पलाइन में काउंसलर के तौर पर सेवाएं देती थी। इस दौरान कई केस आते थे जिनमें महिलाओं को घर से निकाल दिया जाता था। उनके रहने के लिए कोई सुविधा नहीं होती थी। इसके बाद से उन्होंने महिलाओं को आश्रय देने का काम किया। लेकिन, इसके कुछ साल बाद उन्होंने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की ठानी। नाजिया ने कहा कि अगर बेटी शिक्षित एवं काबिल होंगी तो भविष्य स्वयं सुरक्षित रहेगा। 

इनका है सहयोग
नाजिया ने कहा कि संस्था के गठन में सहकारिता विभाग में अधिकारी रमिंद्री मंद्रवाल ने मुख्य सहयोग किया। उनके अलावा मो. इलियास, आरएस नेगी, डॉ. शिव सिंह पाल, डॉ. आरएस चौहान, रानू राणा, सुनील उनियाल, विजय कार्की आदि।
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