हाईकोर्ट ने पिछले दिनों मामले में की थी तल्ख टिप्पणी
जांच पूरी करने के बाद उन्होंने बृहस्पतिवार को गृह विभाग को रिपोर्ट सौंप दी। इसके बाद अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि गढ़वाल आयुक्त ने गांधी पार्क के सामने हुए हल्के बल प्रयोग को कानून एवं शांति व्यवस्था के लिहाज से उचित माना है। लेकिन, हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले में तल्ख टिप्पणी की थी। ऐसे में हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करना जरूरी है। लिहाजा जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने आईजी विम्मी सचदेवा को इस पूरे घटनाक्रम की जांच सौंपी है।
ये पुलिसकर्मी हटाए गए
जांच में रिपोर्ट में इंस्पेक्टर एलआईयू लक्ष्मण सिंह नेगी, शहर कोतवाली के एसएसआई प्रमोद शाह और धारा चौकी प्रभारी विवेक राठी के तबादले की सिफारिश की गई। इस आधार पर एलआईयू इंस्पेक्टर को इंटेलीजेंस मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया है। जबकि, प्रमोद शाह को मसूरी और विवेक राठी को चकराता भेजा गया है।
आठ फरवरी की घटना में मानी पुलिस की लापरवाही
नौ फरवरी को बल प्रयोग यानी लाठी चार्ज तो उचित था। लेकिन, गढ़वाल आयुक्त ने आठ फरवरी की रात हुए घटनाक्रम पर इन तीनों पुलिसकर्मियों की लापरवाही मानी है। बता दें कि आठ फरवरी को युवाओं के आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इसे उन्होंने रात में भी जारी रखा और गांधी पार्क के सामने धरने पर बैठ गए। इस बीच पुलिस वहां पहुंची और सबको उठाने लगी। इसके कई वीडियो भी वायरल हुए। इसमें कुछ पुलिसकर्मी युवाओं से मारपीट करते दिख रहे थे। इसी बात को गढ़वाल आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में शमिल करते हुए इन पुलिसकर्मियों की लापरवाही मानी है।
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भीड़ का आकलन नहीं कर पाई एलआईयू और पुलिस
युवाओं के आंदोलन के दौरान शुरुआत से ही पुलिस के खुफिया तंत्र पर सवाल उठ रहे थे। पुलिस ने इस मामले को हल्के में लेकर तैयारियां की थीं। गढ़वाल आयुक्त ने भी माना है कि एलआईयू और पुलिस भीड़ का आकलन नहीं कर पाई। ऐसे में स्थितियां देखते ही देखते बेकाबू हो गईं। अगले दिन नतीजा यह हुआ कि पुलिस और प्रशासन को मजबूरन लाठी चार्ज का फैसला लेना पड़ा।