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ठंडे मुल्कों में गर्म हुआ देहरादून की ग्रीन टी का बाजार

Thu, 17 Sep 2015 03:58 PM IST
गौरव मिश्रा/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून की ग्रीन टी (चाय) दोबारा देश के साथ ही दुनिया में छा रही है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान के साथ ही मध्य एशियाई ठंडे मुल्कों में इसकी मांग फिर बढ़ गई है।
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औषधीय गुणों की वजह से इसकी मांग सालभर रहती है। देहरादून टी कंपनी (डीटीसी) के महाप्रबंधक नरेश कुमार मिश्रा कहते हैं कि हमारा चाय बागान 600 एकड़ में है। यह ब्रिटिश कालीन चाय बागान है। इसे एक ब्रिटिश चाय कंपनी ने बागान का स्वरूप दिया था।

बताया कि एक समय यहां लाखों क्विंटल चाय का उत्पादन होता था। अब उत्पादन पहले जैसा नहीं रहा। इस समय हर साल 250 क्विंटल ग्रीन टी की पैदावार हो रही है। कहा कि समूचे चाय बागान में पैदावार नहीं हो रही है। हालांकि, जितने में पैदावार हो रही है वह अच्छी क्वालिटी की है।
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इसी वजह से यहां की चाय अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस आदि ठंडे मुल्कों में चाव से पी जा रही है। कहा कि भारत में भी इसकी मांग काफी ज्यादा है। कहा कि हमारा उत्पादन सीमित होने के कारण चाय की ज्यादा सप्लाई नहीं हो सकती।

दून के बहुत पुराने चाय विक्रेता जैन बंधु टी कंपनी के प्रतीक जैन बताते हैं कि देहरादून की ग्रीन टी की मांग सालभर रहती है। इसकी उपलब्धता भी वर्षभर हो जाती है।
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दून की ग्रीन व दानेदार चाय की रही है अंतरराष्ट्रीय पहचान

एक वक्त था जब दार्जिलिंग व असम की ही तरह देहरादून की ग्रीन व दानेदार (सामान्य) चाय की अंतरराष्ट्रीय पहचान थी। देहरादून में 80 का दशक आते-आते दानेदार चाय का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया।

हालांकि, ग्रीन टी का उत्पादन बढ़ता रहा। तमाम व्यावसायिक, पर्यावरणीय, प्रबंधकीय वजहों से इसे भी झटका लगा। वर्ष 1980 तक देहरादून जिले में 3000 एकड़ जमीन पर चाय की खेती होती थी। अब इसका क्षेत्रफल सीमित होकर 600 एकड़ में ही सिमट गया है।

दून में अधिकतर चाय बागान निजी क्षेत्र के ही रहे
राजधानी में अधिकतर चाय बागान निजी क्षेत्र के ही रहे हैं। डीटीसी, दरबार साहब, आरएलसी समेत कई निजी समूह उत्पादन व वितरण के काम में थे। हालांकि, अब मात्र डीटीसी इस व्यवसाय में है।

ग्रीन टी का उत्पादन
उत्पादन : 250 क्विंटल वार्षिक
निर्यात : 80 से 85 प्रतिशत
मूल्य : 200 रुपए किलो से लेकर 600 रुपए तक

चिकित्सकीय गुणों से है भरपूर
अनुभवी वैद्य डॉ. ईशरत हुसैन फारूखी का कहना है कि ग्रीन टी देहरादून की पहचान रही है। ग्रीन टी सेहत के लिए लाभकारी है। इसमें औषधीय गुण होते हैं। इस चाय की तासीर गरम होती है। सर्दी में यह बहुत फायदा करती है।

इससे पाचन क्रिया अच्छी रहती है। मधुमेह और ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए यह विशेषकर फायदेमंद होती है। सर्दियों में यह ठंड से भी बचाती है। शरीर को ताकत देने में यह लाजवाब है।
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