करीब एक करोड़ भटनागर के खाते में गए
जांच में पाया गया कि 99.43 लाख रुपये पीयूष चंद्र भटनागर के व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद इस धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लेयरिंग कर बीमा प्रीमियम भुगतान, नकद निकासी, खातों के बीच ट्रांसफर और अन्य निजी उपयोग में लगाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रवृत्ति समन्वयक और डीएवी (पीजी) कॉलेज के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रंजना रावत ने भी अपराध से अर्जित धन को उत्पन्न करने और उसे वैध दिखाने में सहायक भूमिका निभाई। उन्होंने स्वीकार किया कि देना बैंक खातों से संबंधित कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर किए थे जिनका बाद में छात्रवृत्ति राशि निकालने और डायवर्ट करने में उपयोग किया गया।
7.86 लाख रुपये की संपत्तियां अटैच
जांच में यह भी सामने आया कि अर्जित धन का एक हिस्सा चल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया। इनमें पीयूष चंद्र भटनागर और उसके परिवार के नाम पर बीमा पॉलिसियां, बैंक बैलेंस और एक होंडा एक्टिवा एच-स्मार्ट वाहन शामिल हैं। इसी के तहत गत अस्थायी कुर्की आदेश के माध्यम से 7.86 लाख रुपये मूल्य की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गईं। ईडी ने बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों सहित जांच के दौरान इकट्ठा किए गए साक्ष्यों के आधार पर यह चार्जशीट दाखिल कर दी है।