विकिपीडिया नहीं वैदिक पीडिया की आवश्यकता : चिदानंद मुनि
वेद विज्ञान संस्कृति महाकुंभ में ‘वसुधैव कुटुम्बकम एवं विश्व शांति का आधार भारतीय संस्कृति’ विषयक सत्र में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि देश की रियल जीडीपी किसान, संत और जवान हैं। आज वेद के मंत्र सम्पूर्ण विश्व को आलोकित कर रहे हैं। कहा कि वैदिक विचार वैश्विक विचार है। वेद भाषा विश्व भाषा है और वेद से उपजा बोध वैश्विक बोध है। उन्होंने कहा आज हमें विकिपीडिया के स्थान पर वैदिक पीडिया बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि वेद का ज्ञान विश्व को उपलब्ध हो सके और हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आर्य मनीषियों ने दिखाई तपोबल से समाज को दिशा : आचार्य बालकृष्ण
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि महापुरुष संसार की विकृति से प्रेरित होकर सृजन करने का कार्य करते हैं। ऐसा ही कार्य स्वामी दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद ने किया था उन्होंने समाज को अपने तपोबल से नई दिशा दिखाई। स्वामी श्रद्धानंद का अनुगामी बनाना चाहिए और अनुगामी बनने के लिए साधन नहीं समर्पण की आवश्यकता है।
पश्चिम की संस्कृति ने दुनिया को बाजार माना : निशंक
हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि वेद के ज्ञान से ही संपूर्ण विश्व में सुख, शांति और समृद्धि संभव है। पश्चिम की संस्कृति दुनिया को बाजार मानती है और हमने विश्व को एक परिवार माना है। यह भेद हमें दुनिया से भिन्न करता है। कहा कि भारत ज्ञान की महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुरुकुल कांगड़ी मानव चरित्र निर्माण का कार्य करता है इसलिए नई शिक्षा नीति के क्रियान्वन में गुरुकुल अन्य विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करेगा।