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- हाईकोर्ट ने भी एमडीडीए को प्रकरण का संज्ञान लेने के दिए थे निर्देश
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Iडिफेंस कॉलोनी में ओपन स्पेस को अवैध तरीके से बेचने के मामले में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण और रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज विभाग की भूमिका सवालों के दायरे में आ गई है। पिछले पांच सालों से डिफेंस कॉलोनी के लोग आवासीय प्लॉटों के स्वीकृत लेआउट प्लान में की गई छेड़छाड़ व बॉयलाज के उल्लंघन को लेकर एमडीडीए व कोऑपरेटिव सोसाइटीज विभाग से गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
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Iडिफेेंस कॉलोनीवासियों के अनुसार हाईकोर्ट ने भी एमडीडीए को प्रकरण का संज्ञान लेने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण ने उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। दून की सबसे पॉश कॉलोनियों में से एक डिफेंस कॉलोनी में स्वीकृत लेआउट प्लान में छेड़छाड़ कर प्लाॅटों को अवैध तरीके से बेचने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही संबंधित विभागों पर भी लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। तहरीर के अनुसार यह मामला अचानक संज्ञान में नहीं आया। अवैध तरीके से प्लॉट बेचने का फर्जीवाड़ा कॉलोनी की स्थापना के साथ ही कर दिया गया, लेकिन इसके बारे में जानकारी कॉलोनीवासियों को आरटीआई के तहत वर्ष 2020 में मांगी गई जानकारी में मिला।
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Iपता चला कि 680 प्लॉटों के स्वीकृत लेआउट प्लान की जगह 726 प्लॉटों वाला एक फर्जी व कूटरचित लेआउट प्लान मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में जमा कर दिया गया। जब 680 प्लाॅटों का प्लान पहले से जमा किया गया था तो यह नया प्लान कैसे स्वीकार किया गया, यह बड़ा सवाल है।
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Iयह मामला संज्ञान में नहीं है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बारे में पता कराया जाएगा, जो भी निर्देश होंगे, उनका पालन कराया जाएगा। - बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीएI