-ईपीएफ-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति का आरोप, सामाजिक सुरक्षा में विफल हुई सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ईपीएफ पेंशनरों ने चेतावनी दी है कि देश के 72 लाख पेंशनर न्यूनतम पेंशन और महंगाई भत्ता न मिलने की सूरत में आगामी चुनाव में काम नहीं तो वोट नहीं जैसा महत्वपूर्ण फैसला लेंगे।
ईपीएफ-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने आंदोलन की समीक्षा बैठक में न्यूनतम पेंशन 7500 रुपये और महंगाई भत्ते के चार सूत्री मांगों पर चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन पर चर्चा की। समिति के उत्तर भारत समन्वयक सुरेश डंगवाल ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने वार्ता में कहा है कि श्रम मंत्रालय से न्यूनतम पेंशन व महंगाई भत्ते का प्रस्ताव आने पर निर्णय लिया जाएगा। समिति के सचिव बीएस रावत ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा के नाम पर सेवानिवृत लाखों कार्मिकों के साथ छलावा किया जा रहा है।
केंद्रीय श्रम मंत्री ने आश्वासन तो दिया था लेकिन अब तक कोई नतीजा सामने नहीं आया। 72 लाख पेंशनरों में से हर महीने सैकड़ों की संख्या में स्वर्ग सिधार रहे हैं। साफ है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा देने में विफल हो रही है। बैठक में अनुराग नौटियाल ने कहा कि सरकार पर दबाव बनाने की आवश्यकता है कि विशिष्ट सत्र के दौरान लोक सभा में न्यूनतम पेंशन 7500 व महंगाई भत्ते के प्रस्ताव पर अनुमोदन कराया जाए।
बैठक में समिति के जिलाध्यक्ष राकेश पेटवाल, राजेंद्र राणा और ऋषिकेश के अध्यक्ष ने भी संबोधित किया। इस दौरान मेजपाल, राकेश पेटवाल, टीएस बिष्ट, दिवाकर शाही, अनुराग नौटियाल, बृजेंद्र सिंह, बीएस रावत, पीसी डिमरी मौजूद रहे।