अनुमन्य सीटों पर मेरिट से दाखिले का शासनादेश जारी करने वाली सरकार के अपना ही निर्णय पलट डीएवी, डीबीएस में पुराने पैटर्न पर ही एडमिशन देने के निर्णय के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
सीएम के इस कदम में वोट बैंक की भी गंध आ रही है। माना जा रहा है कि इससे जहां छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को लाभ मिल सकता है, वहीं लोकसभा चुनाव में युवाओं को जोड़ने में भी मदद होगी।
डीएवी कालेज छात्र संख्या के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा कालेज माना जाता है। यहां 32 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। बृहस्पतिवार को मुलाकात में छात्रनेताओं ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बताया कि 90 प्रतिशत छात्र उत्तराखंड के, जबकि दस प्रतिशत ही दूसरे राज्यों से आते हैं।
सीएम ने छात्रों की बात सुन तुरंत फैसला बदलने की हामी भर दी। अब माना जा रहा है कि यह फैसला आगे कांग्रेस और एनएसयूआई के लिए फायदेमंद होगा।
छात्रों से सहमति जताई
एक ओर जहां छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई इसे प्रमुख मुद्दे के तौर पर भुनाने का प्रयास करेगी तो दूसरी ओर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भी इन युवाओं में अपना वोटबैंक तलाश करेगी। मामले पर मेयर विनोद चमोली और विधायक राजकुमार भी पहले छात्रों से सहमति जता चुके हैं।
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