बारिश के बाद मिट्टी की ढांग के झोपड़ी पर जा गिरने से एक परिवार खत्म हो गया। मासूम बेटा-बेटी समेत झोपड़ी में सो रही मजदूर दंपति को बचने का मौका तक नहीं मिला।
तीन घंटे तक आपरेशन के बाद पुलिस ने चारों शव मलबे से निकाले। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए।
राजपुर क्षेत्र के तरला नागल गांव स्थित गब्बर सिंह बस्ती में बिहार-नेपाल से आए मजदूर झोपड़ियां बनाकर रहते हैं। नेपाली मजदूर विनोद थापा (33) यहां एक झोपड़ी में पत्नी सरिता (30), बेटी पूजा (सात) और बेटे निशांत (दो) संग रह रहा था।
मंगलवार रात क्षेत्र में कुछ देर तक भारी बारिश हुई थी। विनोद और परिजन रात करीब दस बजे खाना खाकर सो गए। देर रात 12:30 बजे झोपड़ी के ठीक ऊपर मिट्टी की ढांग तेज आवाज के साथ ढह गई। विनोद की झोपड़ी मिट्टी के मलबे में दब गई।
आवाज सुन बस्ती के दूसरे लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने की कोशिश की। सूचना पर रायपुर पुलिस और दमकल की रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची। तीन घंटे की मशक्कत के बाद सभी शव बाहर निकाल लिए गए।
इस दौरान मौके पर विधायक मसूरी गणेश जोशी, एडीएम, एसडीएम, सीओ सिटी जया बलोनी, तहसीलदार गुरुप्रीत सिंह और रायपुर एसओ अमरजीत सिंह मौजूद रहे।
अवैध है पूरी बस्ती
जिस बस्ती में यह हादसा हुआ, वह पूरा क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से खतरनाक है। बस्ती के ठीक ऊपर कच्ची मिट्टी की ढांग है तो नीचे उफनाती बरसाती नदी। खास बात यह है कि बस्ती पूरी तरह अवैध है।
वर्ष 2012 में जिला प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त अभियान चलाकर बस्ती को खाली करा लिया था, लेकिन कुछ समय बाद ही लोगों ने यहां फिर से झोपड़ियां तान लीं।
प्रशासन ने फिर कार्रवाई को कहा तो निगम ने इस जमीन को ग्राम पंचायत की बताया। लेकिन ग्राम पंचायत के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब हादसे के बाद पुलिस ने बाकी सभी परिवारों को जल्द बस्ती खाली करने को कहा है।
जब रोने लगे पूजा के सहपाठी
विनोद की मासूम बेटी पूजा तरला नागल स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन की छात्रा थी। उसके निधन पर स्कूल ने बुधवार को अवकाश किया। सुबह बच्चे स्कूल आए तो छुट्टी की बात सुन खिल उठे। लेकिन, जब शिक्षिका ने उन्हें बताया कि अब पूजा कभी स्कूल नहीं आएगी, तो उसके सहपाठी रोने लगे। शिक्षकों ने किसी तरह बच्चों को संभाल घर भिजवाया।