जितेंद्र शराब पीने का आदि था, जिस पर तंग आकर उसके ठेकेदार ने उसे काम से हटा दिया था। घटना के दिन जितेंद्र चुपके से निर्माणाधीन भवन में आया और वहां खेल रहे तीन साल के बच्चे को अपने साथ छत पर ले गया।
आसपास के लोगों ने उसे आते और जाते देखा था। कुछ देर बाद जब बच्चा घर नहीं आया तो उसके परिजनों ने तलाशना शुरू किया। इस बीच बच्चे का भाई निर्माणाधीन भवन की छत पर गया तो देखा कि वह बेहोश पड़ा हुआ था।
उसने आसपास के लोगों से पूछा तो जितेंद्र के वहां आने की बात लोगों ने कही। इस पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और कुछ देर बाद जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ रायपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 364, 302 व 377 और 6पोक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अभियोजन की ओर से कुल 12 गवाह पेश किए गए। जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। भरत सिंह नेगी ने बताया कि दोषी को बृहस्पतिवार को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।
आईपीसी 364 में हुआ बरी
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोषी को हत्या और दुष्कर्म में सजा सुनाई है। जबकि, आईपीसी 364 (हत्या के लिए अपहरण) में दोष मुक्त किया है। दोषी मुकदमा दर्ज होने के बाद से जेल में बंद है।