उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने वाले कर्मचारी नेता दौलतराम सेमवाल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
उच्च शिक्षा में लाए कई बदलाव
वह 71 वर्ष के थे। उच्च शिक्षा की बदहाली पर उनकी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही कॉलेजों में अनुमन्य सीटों पर ही दाखिले का नियम लागू हो पाया। इसी फैसले का असर है कि इस साल सभी कॉलेजों में दाखिले जुगाड़ के बजाय मेरिट के आधार पर हुए।
बद्रीश कॉलोनी निवासी दौलतराम सेमवाल के छोटे भाई अनुसूइया प्रसाद सेमवाल ने बताया कि रविवार सुबह करीब 11:30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया। सोमवार को हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
दौलतराम ने प्रदेश में उच्च शिक्षा की बदहाली के लिए डीएवी कॉलेज को नजीर बनाते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा बदहाल है। इस मामले में हाईकोर्ट ने सभी महाविद्यालयों में अनुमन्य सीटों पर ही दाखिले का आदेश जारी किया था।
दौलतराम ने रचा इतिहास
इसके अलावा यूजीसी के निर्देशों के तहत 180 दिन का शिक्षण भी सुनिश्चित कराने के आदेश दिए गए। इस फैसले के बाद खड़े हुए दाखिला संकट से निपटने के लिए सरकार को ईवनिंग क्लासेज का इंतजाम करना पड़ा। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने शोक जताते हुए कहा कि उनकी जनहित याचिका ने इतिहास रच दिया है।