फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिता की शहादत पर बोली बेटियां, न होता पाकिस्तान तो न जाती जान

Thu, 17 Aug 2017 07:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
daghters of martyr narendra singh bisht
विज्ञापन
शहीद नरेंद्र सिंह बिष्ट की बेटियों को अपने पिता की शहादत पर गर्व है। उनका कहना है कि पिता देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए। शहीद की दोनों बेटियों का कहना है कि यदि पाकिस्तान न होता तो हमारे देश के जवानों को सीमा पर जान नहीं गंवानी पड़ती। 
विज्ञापन


वर्ष 1994 में गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए नरेंद्र सिंह बिष्ट एक साल बाद ही रिटायर होने वाले थे। वह अभी 26 जुलाई को ही दस दिन की छुट्टी पूरी कर वापस ड्यूटी पर गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने गांव नाखोली, नारायणबगड़ चमोली जाकर पूजा अर्चना भी की थी।

सात अगस्त को वह आतंकियों से मुठभेड़ में घायल हो गए। नौ दिन शहीद जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। किसी को इस बात का इल्म तक नहीं था कि आतंकियों से लोहा लेने वाला ये वीर जिंदगी की जंग हार जाएगा। बेटियों का क्या पता था कि उनकी सिर से पिता का हाथ ही उठ जाएगा। 
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

मुखाग्नि के पूर्व काफी देर तक पिता के शव से लिपटी रही

उन्होंने बेटियों की पढ़ाई के लिए ही सेलाकुई स्थित हरिपुर में करीब 12 वर्ष पूर्व घर बनाया था। मुखाग्नि के पूर्व बेटियां अपने पिता शहीद नरेंद्र सिंह बिष्ट के शव के काफी देर लिपटी रही। अमर उजाला से बात करते हुए दोनों बेटियों ने बताया कि उनको अपने पिता की शहादत पर गर्व है।

उन्होंने अपने पिता की मौत का जिम्मेदार पाकिस्तान और आतंकवाद को बताया। बेटियों ने मांग की है कि सरकार को सीमा पर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि देश के जवान शहीद न हो। शहीद नरेंद्र के पिता चंद्र सिंह बिष्ट भी फौज में थे। कई वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें