सिपाही गीताराम दुल्हन और बारात के साथ मायूस वापस लौट गए।
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देहरादून के जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में दलित उत्पीड़न का एक और मामला प्रकाश में आया है। इस बार उत्पीड़न का शिकार उत्तराखंड पुलिस का जवान हुआ है। आरोप है कि रंगेऊ गांव में स्थित मंदिर में सिपाही की बारात को प्रवेश नहीं करने दिया गया।
मंदिर समिति पर कार्रवाई की मांग को आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन राज्यपाल को भेजा। ज्ञापन में यह घटना 27 अप्रैल की बताई गई है।
आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के संरक्षक दौलत कुंवर ने बताया कि सिपाही गीताराम निवासी बिसोई तहसील कालसी टिहरी जिले के चंबा थाने में तैनात है। 27 अप्रैल को सिपाही की बारात तहसील चकराता के रंगेऊ गांव गई थी। लौटते समय दूल्हा दुल्हन समेत बारात गांव में स्थित मंदिर में नाग देवता, शिलगुर और महासु देवता के दर्शन करने पहुंची।
मंदिर समिति के लोगों ने मंदिर में लगा दिया ताला
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आरोप है कि मंदिर समिति के लोगों ने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। जिस कारण दूल्हा-दुल्हन और बाराती देवताओं के दर्शन नहीं कर सके। शादी का माहौल होने के चलते उस दौरान इसका विरोध नहीं किया गया।
वे खुद भी शादी में बाराती के रूप में शामिल थे। दौलत कुंवर ने बताया कि इससे पहले 5 अक्तूबर 2015 को भी जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा को गबेला गांव में मंदिर प्रवेश से रोका गया था।
उन्होंने क्षेत्र में राजस्व व्यवस्था हटाकर सिविल पुलिस व्यवस्था लागू करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में अरविंद शर्मा, संतराम, गजेंद्र सिंह, संजीव कुमार, हिमांशु चावला, दिलिप चंद्रा आदि शामिल रहे।
गंभीर नहीं तहसील प्रशासन
जनजातीय क्षेत्र में आए दिन दलित उत्पीड़न के मामले प्रकाश में आ रहे हैं, इसके बावजूद तहसील प्रशासन मामलों को हल्के में ले रहा है। शुक्रवार को मामला प्रकाश में आने के बाद भी एसडीएम प्रेमलाल ने पूरे प्रकरण से यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि शिकायत ज्ञापन के रूप मिली है। ज्ञापन को राज्यपाल को प्रेषित कर दिया जाएगा।