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पांडियन पर भारी पड़ी शिक्षकों की नाराजगी, सचिव पद से हटे

Wed, 03 Aug 2016 11:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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टीचर - फोटो : Amar Ujala
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शिक्षा सचिव डी सेंथिल पांडियन पर शिक्षकों की नाराजगी भारी पड़ गई। प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से उन्हें हटाए जाने के लिए सरकार पर जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा था। उनके विरोध में संगठन की ओर से तीन अगस्त को दून में प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक तक बुला ली गई। वहीं कुछ मामलों में शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी से भी उनकी खटपट होती रही है। आखिरकार मुख्यमंत्री की पसंद रहे पांडियन को आखिरकार शिक्षा सचिव के पद से हटना पड़ा।
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शिक्षा सचिव का पद संभालने के बाद शिक्षा में सुधार को लेकर कुछ फैसलों पर सेंथिल पांडियन को जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा। सीआरपी, बीआरपी की नियुक्ति के मामले में प्राथमिक शिक्षक संगठन ने उनका जबरदस्त विरोध किया। संगठन उन्हें हटाने की मांग उठा रहा था।

शिक्षा मंत्री से भी हुई थी खटपट
संगठन का कहना था कि पूर्व में चयनित होकर आए सीआरपी, बीआरपी को न हटाया जाए, लेकिन पांडियन चाहते थे कि शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए नये चयनित सभी शिक्षकों को तैनाती दी जाए। वहीं तय समय पर काम न करने और हीलाहवाली के मामले में भी पांडियन ने पहली बार एक साथ कई मुख्य शिक्षा अधिकारी स्तर तक के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।
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नवोदय विद्यालयों के संविदा शिक्षकों के सेवा विस्तार और सिफारिशी शिक्षकों के तबादलों के कुछ मामलों में उनकी शिक्षा मंत्री तक से खटपट हुई। विभाग में एक के बाद एक कई बड़े फैसलों के पीछे यह माना जाता रहा है कि वे मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारियों में से एक है, लेकिन शिक्षकों के जबरदस्त विरोध के चलते उन्हें विभाग से हटना पड़ा। 

इनका है कहना
शिक्षा सचिव डी सेंथिल पांडियन को शिक्षा सचिव के पद से हटाया जाना हमारी पहली मांग थी। कई बार के आश्वासन के बावजूद वे संगठन की 24 सूत्री मांगों को पिछले काफी समय से लटकाए हुए थे। -निर्मला मेहर, प्रदेश अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ 
विरोध में चौहान ने छोड़ दिया था पद 
राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने तो कुछ मांगों को लेकर हाल ही में अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया था। वे इस बात को लेकर नाराज चल रहे थे कि मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बावजूद कुछ मांगों पर अमल नहीं हो पा रहा था।
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