अधिवक्ताओं के लिए प्रस्तावित अंशदायी बीमा योजना अब लागू नहीं होगी। इसके बजाय सरकार अब सीधे अधिवक्ता कल्याण कोष में सालाना एक करोड़ रुपये देगी। किसी अधिवक्ता की मृत्यु होने पर आश्रितों को इस कोष से पांच से सात लाख रुपये की मदद दी जाएगी। बार एसोसिएशनों और सरकार के बीच इस संबंध में सहमति बन गई है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फरवरी 2015 में अधिवक्ताओं के लिए अंशदायी बीमा योजना की घोषणा की थी। योजना के तहत अधिकतर प्रीमियम सरकार को देना था। जबकि 25 से 30 फीसदी प्रीमियम बार एसोसिएशनों की ओर से जमा होना था। बार एसोसिएशनों को इसका प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया था। लेकिन प्रस्ताव तैयार न हो पाने और प्रीमियम अधिक होने के कारण योजना को लागू नहीं करने का फैसला लिया गया है।
वर्ष 2012 से चली आ रही थी मांग
उत्तराखंड बार कौंसिल के विशेष कमेटी सदस्य हरि सिंह नेगी व सीएस तिवारी ने कहा कि कौंसिल के पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जिससे वकीलों और उनके परिवारों के लिए वेलफेयर की योजना नहीं चल पा रही है। प्रदेश सरकार से वर्ष 2012 से वकीलों के वेलफेयर के लिए प्रतिवर्ष बजट प्रोविजन की मांग की जा रही थी।
बोले सीएम
अंशदायी बीमा योजना के लिए बार एसोसिएशनों को प्रस्ताव तैयार देने के लिए कहा गया था। लेकिन अब सरकार और एसोसिएशनों के बीच सहमति बनी है कि वकीलों के कल्याण कोष में सरकार की ओर से सालाना एक करोड़ रुपये की मदद दी जाएगी।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री वकीलों के कल्याण के लिए कुछ और घोषणाएं कर सकते हैं। सरकार मृत्यु पर वकील के परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में पांच लाख रुपये दे सकती है। बार एसोसिएशन और बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड की ओर से भी वकीलों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
-अनिल गांधी, सचिव, दून बार एसोसिएसन