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साइबर ठगों ने किसी को मामा तो किसी को दोस्त का पति बन लगाई चपत

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दून में साइबर ठगों का जाल लगातार बढ़ता जा रहा है। साइबर ठग अब ठगने के भी नए तरीके ढूंढ रहे हैं। पिछले दो दिनों में राजधानी में चार साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। इसमें साइबर ठगों ने किसी को मामा, किसी को दोस्त का पति तो किसी को कस्टर केयर अधिकारी बनकर चूना लगाया। तहरीर के बाद विभिन्न थानों में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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दोस्त का पति बन खाते से उड़ाए 68 हजार रुपये
देहरादून। प्रेमनगर के श्यामपुर भागीरथी एन्क्लेव निवासी सुमन खड़का के मोबाइल पर कॉल आई। फोन करने वाले ने उसकी सहेली गुड्डी का पति बनकर उससे बात की। कहा कि उसे कोई पैसा दे रहा है, लेकिन नेटवर्क का इश्यू आने के कारण पैसे उसके खाते में ट्रांसफर नहीं हो पा रहे है। इसके बाद उसने उससे पैसा अपने खाते में डालने को कहा। इसके बाद ठग ने उसे एक पैसे आने का मैसेज भेजा। पीड़ित के मुताबिक उसे लगा कि उसके खाते में पैंसे आ गए हैं। जिसके बाद पीड़िता ने पेटीएम के माध्यम से ठग के खाते में पेटीएम के माध्यम से तीन बार में 68 हजार रुपये डाल दिए। इसके बाद जब पीड़िता ने दोस्त गुड्डी को फोन किया तो तब उसे पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। अकाउंट चैक किया तो वह खाली मिला। साइबर थाने की जांच के बाद थाना प्रेमनगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामा की आवाज में बात कर 61 हजार की ठगी
देहरादून। श्रीदेव सुमन नगर समन परवीन को फोन पर एक कॉल आई। बात करने वाले की आवाज उसके मामा जैसे थी। उसने कहा कि वह उसके अकाउंट में पैसा डलवा रहा है। इसके बाद एक फोनकॉल और आई जिसमें दूसरी तरफ से खुद को सेना का कर्मचारी बताया और कहा कि वह उसे एक क्यूआर कोड भेजेगा, वह उसे स्कैन कर दस हजार रुपये भेज देना। विश्वास दिलाने के लिए उसने एक रुपये भेजने पर दो रुपये वापस मिलने की बात कही और ऐसा करने भी दिखाया। विश्वास होने पर महिला ने 19999 रुपये डाल दिए। लेकिन उसके खाते में कोई पैसा नहीं आया। इसके बाद उसने दोबारा से 24999 रुपये डलवाए और फिर 50000 रुपये डलवा दिए। लेकिन उसके खाते में कोई पैसा नहीं आया। इसके बाद जब उसने मामा को फोन किया तो ठगी का एहसास हुए।
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क्रेडिट कार्ड सेवाएं बंद कराने के नाम पर एक लाख ठगे
देहरादून। चंद्रपाल सिंह प्रजापति निवासी कोल्हूपानी के भी मोबाइल नंबर पर कॉल आई और कॉल करने वाली महिला ने खुद को एसबीआई क्रेडिट बैंक से बताते हुए कहा कि उनके क्रेडिट कार्ड में जो सेवाएं लगी हुई है, उसका वार्षिक शुल्क 1499 रुपये है। कहा कि वह अपने क्रेडिट कार्ड को अपडेट करा ले और अनावश्यक सेवाएं हटा ले। इसके बाद वार्षिक शुल्क 499 कर दिया जाएगा। पीड़ित के मुताबिक फोन करने वाली के पास उसके क्रेडिट कार्ड से संबंधित सभी सूचनाएं थी। इसलिए उसे महिला पर विश्वास हो गया। इसके बाद उसने उसे दो बार ओटीपी भेजा जिसे उसने महिला को बता दिया। इसके बाद उसे मैसेज से दो बार में 75 हजार और 72 हजार रुपये पैसे निकलने का मैसेज आया। जिसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कस्टमर केयर अधिकारी बन खाते से उड़ाई एक लाख 98 हजार रुपये
देहरादून। अंजलि गैरोला निवासी उमेदपुर प्रेमनगर ने बताया कि उसने ऑनलाइन नौकरी के लिए एम्स अस्पताल की साइट पर जाकर नौकरी हेतु आवेदन किया। आवेदन के पश्चात जब नौकरी की फीस हेतु मेरे द्वारा बिलडेस्क के माध्यम से शुल्क जमा करना चाहा तो शुल्क जमा नही हो पाया । लेकिन खाते से धनराशि डेबिट हो गई। जिस पर मेरे पति द्वारा गूगल पर बिल डेस्क का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया। जब उस नंबर पर संपर्क किया तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने स्वंय को बिलडेस्क का कस्टमर केयर अधिकारी बताया। जब उससे 3000 रुपये वापसी के संबंध में कहा तो उनके द्वारा बताया गया कि आपकी धनराशि वापस आ जाएगी। फिर उसने मोबाइल में क्विक सपोर्ट एप डाउनलोड करने को कहा। महिला के मुताबिक जैसे ही यह एप डाउनलोड किया गया, उनके खाते से 198000 रुपये कट गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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