रोने बिलखने का करते हैं नाटक
ठग गिरोह इन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए रोने बिलखने का नाटक करता है और अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगता है। लोग झांसे में आकर सौ से पांच रुपये दे देते हैं। लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है, तब तक बहुत देर हो जाती है। इस तरह से ही रुड़की शहर में ठगों ने दो कॉलोनियों में ठगी की घटना को अंजाम दिया है।
केस नंबर एक
रुड़की के सुभाषनगर में करीब एक सप्ताह पूर्व एक युवक लोगों के घरों के दरवाजे खटखटाता है। साथ ही पड़ोस में कढ़ी चावल बेचने वाले को अपना पिता बताते हुए मौत होने की जानकारी देता है। इसके बाद वह लोगों से अंतिम संस्कार करने के लिए आर्थिक मदद मांगता है। कढ़ी चावल के परिचित होने के चलते लोगों ने उसे सौ से पांच रुपये की मदद की। लेकिन जब बाद में उन्हें पता चला कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो वह हैरत में पड़ जाते हैं।
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केस नंबर दो
रुड़की के बीएसएम चौक के पास एक कॉलोनी में दो दिन पूर्व एक युवक पहुंचता है। वह एक घर का दरवाजा खटखटाता है। इसके बाद वह पास में कपड़ों पर प्रेस करने वाले का नाम लेकर उसे अपना पिता बताता हैै। साथ ही जानकारी देता है कि उनकी मौत हो गई है। अंतिम संस्कार के लिए मदद चाहिए। इस पर कॉलोनी के करीब दस लोग सौ से पांच सौ रुपये दे देते हैं। शाम को जब वह घूमने निकलते हैं तो प्रेस करने वाले को सही सलामत देखते हैं तो होश उड़ जाते हैं। वह उसके पास जाकर जानकारी लेते हैं तो पता चलता है कि उनके साथ ठगी हो गई है।
पुलिस के पास अगर ऐसी शिकायत आती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। लोगों को ऐसे ठगों से सावधान होनी की जरुरत है। किसी भी मामले में बिना पुष्टि किए हुए लोग किसी के झांसे में न आएं।
-प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात