अपने सीढ़ीदार हरियाले खेतों के लिए विख्यात उत्तराखंड के मलेथा की सुंदरता पर दाग नहीं लग पाएगा।
मलेथा को ग्रीन जोन घोषित किया जाएगा। इस बात की जानकारी देर रात अपर मुख्यसचिव राकेश शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसकी सहमति दे दी है। जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।
पर्यावरण के लिहाज से था काफी खतरनाक
उल्लेखनीय है कि मलेथा में पांच स्टोन क्रशर स्थापित करने की मंजूरी देने के बाद से ही वहां के ग्रामीण आंदोलनरत थे। इससे मलेथा कि न सिर्फ सुंदरता पर ग्रहण लगने की बात कही जा रही थी बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी इसे काफी खतरनाक माना जा रहा था।
अमर उजाला ने भी इस मुद्दे को प्रभावशाली तरीके से उठाया था। एक बार में तो स्टोन क्रशरों पर विराम लग गया था, बाद में फिर इन्हें चालू करने की तैयारी हो चुकी थी। प्रशासन की उपेक्षा से एक स्टोन क्रशर स्वामी स्थगनादेश भी लाया था।
उधर, बुधवार को स्टोन क्रशर निरस्त करने का शासनादेश (जीओ) जारी नहीं न होने से अनशन स्थल पर मायूसी का माहौल था। एक दिन पहले मुख्यमंत्री की ओर से भेजी टीम ने आश्वस्त किया था कि बुधवार को क्रशरों के पट्टों को रद्द करने का जीओ जारी कर दिया जाएगा।
बुधवार को क्षेत्रीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी धरनास्थल पर मुख्यमंत्री का संदेश लेकर पहुंचे। उन्होंने जानकारी दी कि चार में से सिर्फ तीन ही पट्टे निरस्त होंगे। इस पर आंदोलनकारी गुस्से में आ गए। अनशकारी समीर रतूड़ी ने अपना अनशन जारी रखा।