शादी का झांसा देकर युवक पर दुराचार का आरोप लगाने वाली महिला को अदालत ने झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर नोटिस जारी किया है। अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय गुरुबख्श सिंह की अदालत ने आरोप साबित नहीं होने पर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। मामला वसंत विहार थाना क्षेत्र का है।
वर्ष 2015 का है यह मामला
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महिला ने आठ दिसंबर 2015 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में कहा था कि एक मेट्रोमोनियल वेबसाइट के जरिये उसकी पहचान नोएडा निवासी अमित दीक्षित उर्फ हनी से हुई। कुछ दिन फोन पर बात होने के बाद अमित ने उसे 25 जुलाई 2015 को शादी की बात करने हरिद्वार बुलाया। यहां एक लॉज में बहला फुसलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी फोटो भी ली और बाद में उसे धमकाकर पहले 40 हजार और फिर चार लाख रुपये लिए। कुछ दिन बाद महिला गर्भवती हो गई। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान महिला पुलिस को दिए अपने बयान से मुकर गई।
अभियोजन की संस्तुति पर उसे पक्ष द्रोही करार दिया गया। अदालत में महिला ने कहा कि पुलिस के कहने पर उसने आरोपी अमित के खिलाफ मजिस्ट्रेटी बयान दिए। जबकि, वकील ने उससे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे और उसमें अपनी मर्जी से शिकायत लिखकर पुलिस को दी।
सभी साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि पुलिस किसी महिला की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं कर सकती है। साथ ही अधिवक्ता भी कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाकर दुराचार जैसी झूठी कहानी नहीं बना सकता। अदालत ने महिला को झूठे साक्ष्य देने का दोषी मानते हुए उसके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 344 के तहत ट्रायल चलाने के आदेश दिए हैं।
क्या है 344 सीआरपीसी
कोर्ट में झूठा साक्ष्य देने पर अदालत ट्रायल चलाने के आदेश देती है। न्यायालय संबंधित पक्ष को मुकदमा दर्ज करने के लिए नोटिस जारी करता है। झूठा साक्ष्य देने का दोषी पाए जाने पर तीन माह की सजा हो सकती है। इस मामले में दुराचार की कथित पीड़िता को नोटिस जारी किया गया है।