स्पीक एशिया कंपनी का संस्थापक राम सुमिरन पाल लोगों से अरबों रुपए ठगकर मुंबई से भागकर देहरादून में रह रहा था।
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वह राजधानी के वसंत विहार क्षेत्र में नाम बदलकर साले के पास रहने लगा था। यही नहीं, यहां रह कर वह साले के साथ रियल इस्टेट का धंधा भी करता रहा, लेकिन दून पुलिस और खुफिया एजेंसियों को उसकी भनक तक नहीं लगी।
दून के हजारों लोग भी ठगी के शिकार
जबकि दून के भी हजारों लोग इसकी ठगी के शिकार हुए हैं और उनका करोड़ों रुपया सुमिरन लेकर भाग गया था। दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी के बाद दून पुलिस और राज्य में सक्रिय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता और कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
दिल्ली में राम सुमिरन की गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आ रही है कि वह देहरादून में फ्लैट बनाकर बेचने लगा था। उस पर जब भी पुलिस का दबाव बढ़ता था तो वह नेपाल भाग जाता था।
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करीब दो साल वह दून में रहकर रियल इस्टेट का धंधा करता रहा। यही नहीं जब उसे अपने पकड़े जाने का डर होता तो वह यहां से नेपाल चला जाता और माहौल अनुकूल होते ही आ जाता था।
कारोबार और आने-जाने जैसी गतिविधियों के बावजूद पुलिस और खुफिया एजेंसियों की पकड़ में नहीं आना उनकी बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।
हर दफ्तर और हर मोहल्ले में हैं कंपनी के पीड़ित
स्पीक एशिया कंपनी ने दून से लेकर पहाड़ों तक में लगभग हर दफ्तर और कॉलोनी में अपना नेटवर्क फैलाया था। एजेंट के जरिये दून के हजारों लोगों के करोड़ों रुपए कंपनी ने हड़पे हैं।
शुरूआत में कंपनी ने ईमेल के जरिये दून में कुछ एजेंट बनाए। उन्हें ऑनलाइन सर्वे भरकर घर बैठे लाखों रुपये कमाने का झांसा दिया। शुरू में सदस्यता शुल्क के नाम पर 11 हजार रुपए कंपनी के बैंक एकाउंट में जमा करने को कहा गया।
लोगों का विश्वास जीतने के लिए आरंभ में चार सर्वे पूरे करने पर साढ़े चार हजार रुपए उनके एकाउंट में दिए गए। एजेंट के नीचे जितने सदस्य बने उनमें से चेन के तहत प्रत्येक का कुछ प्रतिशत हर सदस्य बनाने वालों को मिलता था।
लोगों ने लालच में आकर लाखों रुपए की रकम लगा दी। बाद में कंपनी ने लोगों के सारे पैसे हड़प लिए।
पैसा निकलना मुश्किल
इस तरह के मामलों में पैसा वापस लेने की प्रक्रिया बड़ी जटिल है। लोग लालच में आकर और बिना ठोस आधार के पैसा लगा देते हैं। पैसा वापस लेने के लिए अनुबंध के दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
- सूरत सिंह नेगी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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