गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंध समिति की बैठक में उपप्रधान, महासचिव और सचिव को उनके पदों से निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा न्यायालय से दोषमुक्त होने तक तीनों सदस्य भी नहीं रहेंगे।
तीनों पदाधिकारी गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा के विरुद्ध कार्य करने के आपराधिक मुकदमे में वांछित चल रहे हैं, इसी के चलते यह कदम उठाया गया है। बैठक में सर्वसम्मति से धन्ना सिंह को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया।
उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश में स्थित 1250 गुरुद्वारों का संचालन करने वाले ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के प्रबंधन के लिए बनी कमेटी फिर सुर्खियों में आ गई है। बुधवार को गुरुद्वारा प्रधान जसविंदर सिंह गिल की अध्यक्षता में सभागार में कमेटी की बैठक हुई, जिसमें सदस्यों की मौजूदगी में प्रधान गिल ने गुरुद्वारा रजिस्टर्ड नियमावली-1987 के प्रावधान के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उपप्रधान सेवा सिंह, महासचिव प्रीतम सिंह संधू और सचिव केहर सिंह को पद से निलंबित कर दिया और तीनों की सदस्यता भी खारिज कर दी।
गिल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि श्री गुरुनानक बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य ने बीती पांच अप्रैल को तीनों पदाधिकारियों के खिलाफ सरकारी कार्यों में बाधा पहुंचाने और अशोभनीय व्यवहार करने का मुकदमा थाने में दर्ज कराया था। जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसके विरुद्ध तीनों पदाधिकारियों ने उच्च न्यायालय में रिट दायर की, जो बीती 18 सितंबर को खारिज हो गई।
नहीं थम रहा गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी का विवाद
तीनों पदाधिकारियों पर प्रशासन शांति भंग में तीन बार कार्रवाई भी कर चुका है। प्रधान ने कहा कि तीनों पदाधिकारी पदों पर रहते हुए गुरुद्वारा सहिब की मर्यादा के विरुद्ध कार्य कर रहे थे, जिससे गुरुद्वारा साहिब की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही थी। बैठक में 27 में से 13 सदस्यों के साथ ही एक नामित सदस्य मौजूद रहा।
बैठक की कार्यवाही डीएम को भेज दी है।
बैठक की अध्यक्षता प्रधान जसविंदर सिंह गिल और संचालन धन्ना सिंह ने किया। वहां हरचन्द सिंह, निशान सिंह, प्रकट सिंह, हरभाग सिंह, जोगिन्दर सिंह, हरविंदर सिंह, जरनैल सिंह, महेंद्र सिंह, प्रीतम सिंह चावला, हरनाम सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू, त्रिलोक सिंह बघौरा आदि थे ।
नहीं थम रहा गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी का विवाद
ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंध कमेटी का विवाद बुधवार को फिर चर्चा में रहा। 1998 के बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर उत्तर प्रदेश के 15 और उत्तराखंड के 12 क्षेत्रों के गुरुद्वारों से प्रतिनिधियों के चयन और 22 दिसंबर 2016 को निदेशकों के चुनाव के बाद प्रबंधन के लिए सर्वसम्मति से जसविंदर सिंह गिल को गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधन कमेटी का प्रधान, सेवा सिंह को उपप्रधान, प्रीतम सिंह संधू को महासचिव व केहर सिंह को सचिव नियुक्त किया गया था।
तीन सदस्यों का मनोनयन भी हुआ था। प्रधान व अन्य पदाधिकारियों के अलग-अलग मतों से कार्यकारिणी बनने के बाद भी विवाद बरकरार था। पदाधिकारी एक-दूसरे के निर्णय को खारिज करने के प्रयास में लगे थे। प्रधान ने बालिका इंटर कालेज प्रधानाचार्य के पद पर रविंद्र कौर को नियुक्त किया था। तीनों पदाधिकारी इसके विरोध में थे। ब्यूरो