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उत्पीड़न का शिकार हैं तो यहां मिलेगी मदद

Sun, 24 Nov 2013 11:20 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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महिलाओं को कभी घर तो कभी बाहर किसी-न-किसी तरह के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। यह उत्पीड़न कभी मानसिक होता है तो कभी शारीरिक।
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चुप्पी साध लेती हैं महिलाएं
कई मामलों में वह चुप्पी साध लेती हैं। कई कार्य छोड़कर घर बैठ जाना पसंद करती है तो कई स्थिति बर्दाश्त नहीं कर पातीं और जीवन समाप्त कर लेती है।

‘तहलका’ के ताजे मामले से यौन उत्पीड़न पर नई बहस छिड़ी है। पुलिस और कानून के जानकारों का कहना है कि चुप्पी से न्याय मिलने वाला नहीं।

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बार कौंसिल की पूर्व अध्यक्ष रजिया बेग कहती हैं कि अब स्थिति बदली है, महिलाएं उत्पीड़न के खिलाफ आगे आई हैं और उन्होंने न्याय भी पाया है।

चुप रहना किसी समस्या का समाधान नहीं। अगर महिला लोक लाज के डर से आगे नहीं आना चाहती तो रिश्तेदारों की तरफ से भी मामला दर्ज हो सकता है।

डीआईजी गढ़वाल रेंज अमित सिन्हा के अनुसार यूं तो कोर्ट रूलिंग है कि यौन उत्पीड़न या इस तरह के मामलों में महिला का नाम सार्वजनिक न हो।

पुलिस भी ऐहतियात बरतती है। इस पर भी अगर उत्पीड़ित महिला आगे नहीं आना चाहती तो उसके रिश्तेदार उसकी तरफ से मामला दर्ज करा सकते हैं।

जंजीरों को तोड़ना होगा
उनके मुताबिक महिलाओं के लोक-लाज की वजह से आगे न आने के चलते कई मामले पंजीकृत तक नहीं हो पाते। स्थिति बदलने के लिए महिलाओं को इन जंजीरों को तोड़ना होगा।

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पूर्व डीजीपी ज्योति स्वरूप पांडे के अनुसार कोर्ट रूलिंग के अनुसार महिला का नाम उत्पीड़न के मामले में सार्वजनिक नहीं होता, लेकिन मुकदमा दर्ज करने के लिए तो उसको सामने आना ही होगा। कोर्ट भी जाना होगा।
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उनकी मानें तो कार्य स्थल पर उत्पीड़न के मामलों में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी है। जरूरत इस बात की है कि तमाम संस्थानों में एक विभागीय कमेटी बने, जहां इस तरह की शिकायतें की जा सकें।
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जो मामलों की जांच करे और फिर तय करे कि इस तरह के मामले में क्या कदम उठाया जाए। इस कमेटी में महिलाओं की भी भागीदारी होनी चाहिए।

हमसे साझा करें दर्द
अगर आप भी हैं किसी तरह के उत्पीड़न की शिकार तो हमसे साझा कर सकती हैं अपना दर्द। हमारे एक्सपर्ट आपको बताएंगे कि किस तरह से आप बुलंद कर सकती हैं आवाज और पा सकती हैं न्याय।

हमारे एक्सपर्ट हैं
रजिया बेग, पूर्व अध्यक्ष बार कौंसिल
जेसी पांडे, पूर्व डीजीपी, उत्तराखंड
अपनी समस्या इस मोबाइल नंबर पर साझा करें
9675859054 (दोपहर 12 बजे से दो बजे के बीच)
ईमेल पर भी लिख भेज सकती हैं
praveshk@ddn.amarujala.com

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