हरिद्वार जिले में महिला अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। घर की चौखट हो या सार्वजनिक स्थान, कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। रेप, अपहरण, सरेराह छेड़खानी, दहेज उत्पीड़न सरीखी घटनाओं ने आमजन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दो साल में तीन गुने मामले
हरिद्वार में वर्ष 2011 में जहां रेप के 25 मामले सामने आए थे, वहीं 2013 में बढ़कर 70 हो गए। यह वो मामले हैं जो पुलिस रिकार्ड में दर्ज किए गए हैं।
महिला उत्पीड़न के इससे कहीं अधिक मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते, या फिर पुलिस दर्ज ही नहीं करती।
दहेज उत्पीड़न भी बढ़ा
दहेज उत्पीड़न के मामलों में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2011 में जहां दहेज उत्पीड़न के 56 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2013 में बढ़कर 101 हो गए।
छेड़खानी के अधिकांश मामले तो पुलिस में दर्ज ही नहीं किए जाते फिर भी यह 2011 के मुकाबले 12 से बढ़कर 17 हो गए हैं।
पीड़िता के परिजनों को एक करोड़ की मांग
डा. बीआर अंबेडकर जन कल्याण समिति ने बैठक कर हरिद्वार में नाबालिग छात्रा की दुष्कर्म के बाद की गई हत्या को शर्मनाक बताया। एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। जिसमें पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये दिए जाने की मांग उठाई।
प्रीत विहार कालोनी में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष बाबूराम ने कहा कि हरिद्वार में नाबालिग छात्रा के साथ किए गए दुष्कर्म और हत्या की घटना ने समाज को शर्मसार किया है। उन्होंने मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाए जाने की मांग की।
महासचिव चंद्र प्रकाश ने कहा कि समाज में बेटियों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं रह गया है। इसके लिए पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था जिम्मेदार है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई
बैठक के बाद समिति पदाधिकारियों ने तहसील पहुंचकर एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में दोषियों को जल्द गिरफ्तार किए जाने, फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दोषियों को छह माह में सजा दिए जाने, पीड़ित परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिए जाने की मांग की।