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सिरफिरे प्रेमी के सुसाइड की सनसनीखेज कहानी

Thu, 08 Jan 2015 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोपेश्वर
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प्रेमिका की हत्या करने के बाद खुद भी जेल में फांसी लगाने वाले हत्यारोपी प्रेमी नितिन के शव का परिजनों की गैर मौजूदगी और उप जिला मजिस्ट्रेट जोशीमठ अनूप कुमार नौटियाल और पांच लोगों के सामने पंचनामा भरा गया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम किया गया।
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प्रशासनिक अधिकारी दिनभर मृतक के परिजनों की राह देखते रहे। बुधवार सुबह साढे़ ग्यारह बजे तक जब नितिन के परिजन नहीं आए तो एसडीएम अनूप कुमार नौटियाल ने दूरभाष पर मृतक के पिता अंगूर दास (रुड़की भगवान पुर निवासी) से संपर्क किया। उन्होंने उनकी गैर मौजूदगी में पंचनामा और पोस्टमार्टम पर सहमति जताई।

दोपहर दो बजे शव का पोस्टमार्टम हुआ। प्रशासन ने पंचनामा और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी करवाई। इसके बाद एसडीएम ने पुरसाड़ी जेल के बैरक का निरीक्षण किया, जहां मृतक ने फांसी लगाई थी। उन्होंने दोनों मफलर अपने कब्जे में ले लिए। प्रभारी जेलर प्रेम सिंह चौहान ने जेल में एक-एक कर बंदियों और सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज किए।
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वहीं प्रभारी जिला अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि मामले की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। मामले में कारागार प्रशासन ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

सुसाइड के लिए दूसरे बंदी का मफलर भी ले गया

नितिन जेल के बाथरूम में फांसी लगाने के लिए दूसरे बंदी का मफलर भी ले गया था। बताया जा रहा है कि सभी बंदियों ने अपने-अपने मफलर धूप में सुखाए थे। नितिन ने चुपके से दूसरे बंदी का मफलर भी निकाल लिया था और दोनों मफलरों को जोड़ने के बाद फांसी लगाई थी।

अब तीन फीट रहेंगे शौचालय के दरवाजे
बाथरूम में फांसी लगाने के बाद कारागार प्रशासन ने अब बाथरूम के दरवाजों को छोटा कर दिया है। कारागार की सभी छह बैरकों में मौजूद शौचालयों के दरवाजे साढ़े छह फीट से घटाकर सिर्फ तीन फीट तक कर दिए हैं। इससे शौचालय में जाने के बाद कैदी पर आसानी से निगरानी की जा सके।

जिला कारागार के प्रभारी जेलर प्रेम सिंह चौहान ने कहा कि बंदी के आत्महत्या के बाद जेल में सुरक्षा बंदोबस्तों में बदलाव किए जा रहे हैं, जिसके चलते अभी शौचालयों के दरवाजों में तत्काल बदलाव कर दिया गया है। प्रत्येक बंदी की मुस्तैदी से निगरानी की जा रही है।
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जब उतारा गया तब चल रही थी सांसे

नितिन के फांसी लगाने के बाद जब सुरक्षा कर्मियों ने उसे बाथरूम से निकाला तो, उसकी सांसें चल रही थीं। यदि जेल में चिकित्सक होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। जिला कारागार से निकटतम चिकित्सालय की दूरी 10 किमी है।

फर्स्ट एड तक नहीं
पुरसाड़ी कारागार में एक चिकित्साधिकारी का पद सृजित है, लेकिन स्थापना के बाद से ही वह रिक्त चल रहा है। यहां तक कि कारागार में फर्स्ट एड की व्यवस्था तक नहीं है।

चार बार निरीक्षण के बाद नहीं दिखी खामी
पुरसाड़ी जेल चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों की संयुक्त जेल है। यहां विचाराधीन कैदी रखे जाते हैं। जेल का प्रत्येक तीन माह में रुद्रप्रयाग और चमोली का जिला और न्यायालय प्रशासन निरीक्षण करता है।

रसाड़ी जेल में यह पहली घटना है। आपदा के दौरान जेल की 10 मीटर ऊंची चारदीवारी करीब एक वर्ष तक क्षतिग्रस्त रही थी। जेल में सुरक्षा कर्मियों का भी भारी टोटा बना हुआ है। जेल में जेल अधीक्षक का एक डिप्टी जेलर के दो और बंदी रक्षक के 12 पद रिक्त हैं।
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