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बंगला-गाड़ी के ख्वाब ने मीनाक्षी को दलदल में धकेला

Wed, 03 Dec 2014 09:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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दून से चर्चित हर्षित अपहरण कांड की मास्टर माइंड मीनाक्षी उर्फ अंजलि का ख्वाब बेहद खतरनाक निकला। मीनाक्षी के एक परिचित युवक ने बताया कि अक्सर वह कहती थी कि जल्द ही मेरे पास बड़ा सा बंगला होगा, जिसके आगे दो लग्जरी कार होगी।
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ये सब होगा कैसे? इस सवाल पर वह बस मुस्करा देती थी। शायद ऐसी किसी खतरनाक साजिश की पटकथा उसके शातिर दिमाग में लंबे समय से थी।

अमर उजाला संवाददाता से मिले मीनाक्षी के परिचित ने बताया कि वह ग्रेजुएट नहीं थी, पर पढ़ाई लिखाई की बात खूब करती थी और अपने को बीकॉम की छात्रा बताती थी। बेहद तेज दिमाग की मीनाक्षी मोबाइल फोन की गणित से भली भांति वाकिफ थी, लेकिन वह कैसे गच्चा खा गई, इससे वह हैरान है।
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कहती थी, जल्द होगा बंगला और लग्जरी कार

मीनाक्षी के सहकर्मी रहे युवक की मानें तो वह बोलती थी जल्द उसका एक बड़ा बंगला होगा। दो लग्जरी कार उसके बंगले की शोभा बढ़ा रही होगी, लेकिन मुट्ठी भर तनख्वाह में ये कैसे होगा, ये बात पूछते ही वो हंसकर टाल देती थी। युवक की माने तो घर के सारे निर्णय भी वही लेती थी।

पिता भी उसकी बात नहीं टालता था। उसने बताया कि मीनाक्षी के कई युवक मित्र थे, क्योंकि वे मॉडर्न एवं खुले विचारों का होना दर्शाती थी। ये सच है कि पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।

मीनाक्षी का ही दोस्त था डेनियल
हर्षित को नशे का इंजेक्शन देने वाले सीएमआई अस्पताल के कर्मचारी डेनियल से भी मीनाक्षी की दोस्ती थी। बताते हैं कि उसकी मां कुछ समय सीएमआई में बीमारी के कारण भर्ती रही, तब उसकी मुलाकात डेनियल से हुई थी। डेनियल का उसके घर भी आना जाना था।
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नाव चलाते थे दादा और दादी थी होमगार्ड

मास्टर माइंड मीनाक्षी उर्फ अंजलि के दादा सन 1968 में मुजफ्फरनगर से कनखल के कुम्हारगढ़ा मोहल्ले में आकर बस गए थे। दादा ने चंडीघाट पुल के न बनने तक नीलधारा नदी पर नाव चलाकर अपना परिवार पाला। उसकी दादी सोमा देवी होमगार्ड थी और दबंग छवि की थी।

मंगलवार को जब बालियान परिवार की करतूत सुर्खियां बनी, तब मोहल्ला कुम्हारगढ़ा में हर कोई सन्न रह गया।

आरोपी संजय बालियान का घर खरीदने वाले किराना व्यापारी रमेश बोलते हैं कि जब सुबह अखबार देखा तो विश्वास नहीं हुआ। संजय ऐसा भी कर सकता है वो भी अपने बच्चों के साथ मिलकर। वे बोलते हैं कि संजय ने यह कहकर कुम्हार गढ़ा मोहल्ला छोड़ा था कि यहां माहौल अच्छा नहीं है। बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है।
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