उत्तराखंड के पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत रेप प्रकरण का पूरा सच अभी सामने आना बाकी है? महिला के सच और झूठ की कहानी बेहद उलझी हुई है।
पत्रावलियों के आधार पर पुलिस ने ऐसे अनगिनत सवाल तैयार किए हैं, जिनके जवाब देना महिला के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि महिला के बयान लेने से पहले दून पुलिस पूरा होमवर्क करने में जुटी है, ताकि मजबूती से घेराबंदी की जा सके। आने वाले दिनों में महिला की मुश्किलें बढ़ने वाली है।
देहरादून पुलिस रेप केस से जुड़ी तमाम पत्रावलियों के जरिये दिल्ली पुलिस के साथ महिला को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में है। बुधवार और बृहस्पतिवार को एफआईआर और 164 में दो बार दिए गए बयानों पर मंथन के साथ खामियों को तलाशने का काम चलता रहा। पकड़ में आए कई झूठ को लेकर पुलिस बेहद उत्साहित है।
पुलिस की मानें तो महिला के बयानों में काफी ऐसे सवाल है, जिनके जवाब सामने आने नहीं आए है। पुलिस के मुताबिक सफदरजंग थाने में मुक दमा दर्ज कराने के लिए दी गई तीन पेज की तहरीर में डेट और समय के साथ घटनास्थल और बातचीत का सिलसिलवार ब्यौरा दिया गया है। साथ ही 2002 में पहले दर्ज हुए केस का भी उल्लेख है। बदले बयानों में महिला का कथन बेहद गोलमोल भरा रहा है।
बयान में हरीश रावत के तीन मूर्ति के घर के लैंड लाइन नंबर पर पुराने केस को लेकर पीए से बात होने का जिक्र किया गया है। हरीश रावत से मिलने का टाइम मिलने की बात भी बयानों में बताई है, लेकिन वह मिलने नहीं गई। बयानों के मुताबिक महिला को हरीश रावत के पीए से ही हरक सिंह का मोबाइल नंबर मिला था।
पीए ने कहा था कि हरक सिंह रावत के खिलाफ रेप का नया केस लगाओ तो उसकी सारी समस्याएं हल कर दी जाएंगी। फिर मैने 29 जुलाई को हरक सिंह रावत के खिलाफ झूठा मुकदमा कायम करा दिया। अब सवाल है कि हरीश रावत का वो पीए कौन है, जिससे महिला की तीन से चर बार बात हुई है।
क्या मात्र पीए के कहने पर रेप की पूरी कहानी बनाई गई। ऐसी क्या प्राब्लम थी कि महिला को झूठा मुकदमा कायम कराना पड़ा। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि दून पुलिस की विवेचना में कितना दूध का दूध और पानी का पानी कर पाएगी।