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बदमाशों के आगे दुबकी पुलिस, डाल दिए हथियार

Tue, 16 Dec 2014 01:38 PM IST
चंद्र मोहन शर्मा/ अमर उजाला, बागपत
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यदि देहरादून पुलिस ने जरा सी भी दिलेरी दिखाई होती तो अमित उर्फ भूरा को छुड़ाने के लिए आए बदमाश मौके पर ही ढेर हो सकते थे।
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एक हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल होने के बावजूद एक ने भी बदमाशों का मुकाबला करने की कोशिश नहीं की। पुलिसवालों के पास एके-47 और एसएलआर जैसे असलाह थे, फिर भी एक भी गोली नहीं चलाई।

बदमाशों ने जैसे ही फायर किए, पुलिस वाले वैसे ही हथियार छोड़कर भागने लगे। इन्हें बदमाशों ने उठा लिया। सिर्फ एक सिपाही अपनी एसएलआर लेकर भागा। बाकी खाली हाथ दौड़े। ये पुलिस वाले पहले ट्रक के पीछे छुपे। इससे भी उनका डर नहीं निकला तो खेत में जाकर चुपचाप दीवार के पीछे दुबककर बैठ गए।
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जिस रविंद्र की एसएलआर लुटने से बची, वह उत्तराखंड पुलिस से पहले आर्मी में रहा था। चश्मदीद ने बताया जब बदमाश काफी दूर चले गए, तब उसने ट्रक के नीचे सड़क पर ही पोजीशन ली।

खुद रविंद्र ने आईजी को बताया, ‘मैं एसएलआर का ट्रिगर दबा रहा था, लेकिन गोली नहीं चल रही थी, उसकी मैगजीन निकलकर जमीन पर गिर गई थी।’ हेड कांस्टेबल गंगाराम ने कहा ‘मैंने भूरा की हथकड़ी पकड़ रखी थी, मेरी आंखों में मिर्ची का स्प्रे गिर गया था, मुझे कुछ नजर नहीं आया, बदमाश हथकड़ी समेत भूरा को ले गए ।’

सिर्फ एक की आंखों में आया मिर्च स्प्रे का असर
पांचों सिपाहियों ने बताया उनकी आंखों में मिर्ची स्प्रे डाला, लेकिन इसका असर गंगाराम के अलावा किसी की आंखों में नजर नहीं आया।

चश्मदीद थ्री व्हीलर चालक मीतली गांव निवासी सप्पल ने कहा गोली चलते ही सिपाही सड़क किनारे खड़े ट्रक के पीछे छुप गए, इन्होंने आंखें बंद कर ली थी, इसके बाद सड़क किनारे के खेत में घुस गए। मुकाबला करना तो दूर की बात है, कोई जोर से चिल्लाया भी नहीं।

कब क्या हुआ
रविवार रात 7.40 बजे : भूरा को लेकर पुलिस देहरादून से एक्सप्रेस ट्रेन से चली।
रविवार रात 12 बजे : पुलिस भूरा को लेकर सहारनपुर रेलवे स्टेशन पहुंची।
सोमवार सुबह 3.15 बजे : सहारनपुर से पुलिस बागपत के लिए पैसेंजर ट्रेन में बैठी।
सुबह 6.30 बजे : पुलिस टीम अग्रवाल मंडी टटीरी रेलवे स्टेशन पहुंची।
सुबह 6.50 बजे : पुलिस टटीरी से थ्री व्हीलर में बागपत कोर्ट के लिए चली।
सुबह 7.0 बजे : बागपत के राष्ट्र वंदना चौक से दो बदमाश सवारी बनकर बैठे।
सुबह 7.15 बजे : बड़ौत रोड पर क्रिस्तु ज्योति स्कूल के सामने वारदात हो गई।
सुबह 7.35 बजे : सूचना देने पुलिस थ्री व्हीलर से बागपत कोतवाली पहुंची।
सुबह 7.45 बजे : सूचना पर पुलिस ने बदमाशों की तलाश में कांबिंग शुरू की।
सुबह 10 बजे : आईजी मेरठ जोन ने मौका ए वारदात पर पहुंचकर समीक्षा की।

नौकरी तो गई तुम्हारी, अब तुम रिक्शा चलाना

बागपत में मौका ए वारदात पर पहुंचे आईजी मेरठ जोन आलोक शर्मा यह पता चलते ही गुस्से में आ गए कि देहरादून के पुलिस वालों ने बदमाशों का मुकाबला करने की जरा भी कोशिश नहीं की। आईजी ने कहा कि शर्म नहीं आती तुम्हें, पुलिस में क्यों भर्ती हुए, असलाह तक बचा नहीं पाए, तुम भी बदमाशों के साथ ही चले जाते। होमगार्ड के लायक हो, भर्ती हो गए पुलिस में।

पुलिस वाले सफाई देते रहे उनकी आंखों में मिर्ची स्प्रे गिर गया था, लेकिन आईजी को इस पर यकीन नहीं हुआ कि एक बदमाश ने पांच पुलिस वालों की आंखों में एक साथ स्प्रे डाल दिया। आईजी ने एक-एक कर पांचों पुलिस वालों से बात की। सिर्फ हेड कांस्टेबल गंगाराम की आंखें लाल थी।

उसे देखकर लग रहा था वास्तव में मिर्ची स्प्रे डाला है, लेकिन बाकी पुलिस वाले एकदम ठीकठाक थे। आईजी ने कहा तुम्हारी आंख में स्प्रे नहीं गिरा है। रविंद्र से पूछा कि तुम्हारा असलाह बच गया था, तो गोली क्यों नहीं चलाई। बोला, चलाई तो थी, पर चली नहीं। आईजी का पारा और चढ़ गया।

अगला सवाल गंगाराम पर दागा, हथकड़ी तुमने ही पकड़ रखी थी ना, तुम क्यों नहीं गए, बदमाश को क्यों छोड़ दिया। गंगाराम आंख मलते मलते बोला, बहुत कोशिश की। आईजी ने पूछा, जब भूरा की पेशी आज थी, तो कल लेकर क्यों चले। देहरादून से तो चार ही घंटे का रास्ता है।

गंगाराम ने जवाब दिया, हमारे एसएसपी साहब ने कह रखा है दूर के बदमाश को एक दिन पहले ले जाया करो। आईजी ने कहा अब तो तुम्हारी नौकरी गई, अब तुम रिक्शा चलाना।

विशाल मेगामार्ट की डकैती से सुर्खियों में आया

मुजफ्फरनगर के सरनावली गांव निवासी अमित उर्फ भूरा ने सुनील राठी के इशारे पर पांच अगस्त को रुड़की जेल के बाहर गोलियां चलाकर तीन लोगों की हत्या कर दी थी। दून के विशाल मेगा मार्ट की डकैती में पहली बार भूरा का नाम सुर्खियों में आया था। उत्तराखंड एसटीएफ  ने नौ अगस्त को भूरा को पकड़ा था।

उसे बाद में हरिद्वार से देहरादून जेल में स्थानांतरित किया गया था। पुलिस लाइन से सहायक उपनिरीक्षक गंगाराम, सिपाही धर्मेंद्र, रविंद्र, ईलम चंद और प्रदीप रविवार शाम गैंगेस्टर मामले में भूरा को दून जेल से बागपत कोर्ट में पेशी के लिए ले गए थे। अभिरक्षा में गई पुलिस टीम के पास दो एके 47 और दो एसएलआर भी थी।

सोमवार सुबह सहारनपुर से पैसेंजर ट्रेन से बागपत स्टेशन पर उतरे थे। टैंपो से कोर्ट जाते समय भूरा को उसकेसाथियों ने पुलिस टीम की आंखों में मिर्च का स्प्रे डालकर छुड़ा लिया।

सवालों के घेरे में पुलिस की भूमिका
पुलिस सूत्रों ने बताया अमित उर्फ भूरा के अग्रवाल मंडी टटीरी पहुंचते ही देहरादून के एक सिपाही ने अभिरक्षा में लगे धर्मेंद्र नामक सिपाही को फोन करके उनकी लोकेशन मालूम की। देहरादून का यह सिपाही पहले भूरा की अभिरक्षा में आता था।

पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है। इसके अलावा यह बात भी जांच के दायरे में है कि बदमाश को थ्री व्हीलर से क्यों ले जाया गया। ऐसे खतरनाक अपराधी वज्र वाहन में जाते हैं।
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16 की उम्र में भूरा ने किया पहला गुनाह

भूरा को शानों शौकत से जीने का शौक है। उसे स्वचलित हथियार रखने का भी बड़ा शौक है। रुड़की गैंगवार में उसने इटली निर्मित कारबाइन का इस्तेमाल किया था।

भूरा ने 16 साल की उम्र में मोबाइल विवाद पर एक व्यक्ति का कत्ल किया था। लूट और डकैती जैसे संगीन अपराध करने के बाद सुनील राठी के संपर्क में आने के बाद उसका अपराध की दुनिया में कद और भी बढ़ गया।

करीब डेढ़ साल पूर्व उसकी शादी हुई थी। पिछले वर्ष देहरादून में विशाल मेगामार्ट की लूट में भी वह शामिल था। कुख्यात अपना अलग गैंग चलाकर वारदातों को अंजाम देता था। वैसे तो पश्चिमी यूपी के कई गिरोहों के संपर्क में वह रह चुका है।

लेकिन, तिहाड़ जेल में उसकी मुलाकात सुनील राठी से हुई तो वह उससे काफी प्रभावित हुआ था। सुनील राठी ने भी उसकी हिम्मत और दिलेरी को भांपते हुए उससे  अपने लिए काम करने को कहा तो वह राजी भी हो गया। पुलिस की माने तो कुख्यात के खिलाफ रुड़की, देहरादून और यूपी में लूट, हत्या और डकैती के 47 मुकदमे दर्ज हैं।

यूपी, उत्तराखंड पुलिस के लिए बना सिरदर्द
बागपत से फरार होने वाले कुख्यात भूरा यूपी और उत्तराखंड पुलिस के लिए सिरदर्द साबित होगा। उसके फरार होने से दोनों राज्यों में अपराध का ग्राफ बढ़ना तय माना जा रहा है। पुलिस ने उसे अगर जल्द ही गिरफ्तार नहीं किया तो वह बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
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