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'हफ्ता वसूली' नाम बदला, खौफ नहीं

Mon, 02 Sep 2013 07:28 PM IST
अमर उजाला, एमएस नवाज, हरिद्वार
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धर्मनगरी हरिद्वार के व्यापारियों से रंगदारी वसूलने का धंधा नया नहीं है। पिछले दो दशकों से हरिद्वार और रुड़की के व्यापारी बदमाशों का सॉफ्ट टारगेट बनते रहे हैं।
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उदयराज सैनी, जितेंद्र भूरी के दौर से लेकर जीवा, राठी और चीनू पंडित व्यापारियों को खौफ दिखाकर रंगदारी वसूलते रहे हैं। कई बदमाश पुलिस मुठभेड़ में मारे गए तो कई सलाखों के पीछे पहुंचे। लेकिन, रंगदारी का धंधा बदस्तूर चलता रहा।

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बदमाशों की नजर में व्यापारी
अलग जिला बनने के बाद से हरिद्वार और रुड़की आर्थिक रूप से संपन्न रहे हैं। यहां के व्यापारियों की आर्थिक तरक्की बदमाशों की नजर में आई तो यहां व्यापारियों से रंगदारी मांगने का खेल चल पड़ा।
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एक फोन पर पहुंचा आते हैं माल
हरिद्वार में रंगदारी के धंधे को उदयराज सैनी और सुशील मूंछ सरीखे बदमाशों ने हवा दी। इसके बाद जितेंद्र भूरी, सुशील उदलहेलड़ी, गुलजार, नाजिम सलमानी, प्रताप पाल, राजबीर गिद्दावाली, विश्वास पंडित, दिलीप उर्फ बिट्टू, पंचम चौहान, सुनील खटका, अकबर मुल्ला, एश्वर्या पाल आदि बदमाशों पर व्यापारियों से रंगदारी वसूलने के आरोप लगते रहे।

व्यापारियों में इन बदमाशों का खौफ इतना रहा कि एक फोन पर व्यापारी रंगदारी देने में ही अपनी खैरियत समझते थे। वर्ष 2000 से 2005 के बीच पुलिस कार्रवाई में इनमें से कई बदमाश मारे गए, तो कइयों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।

गैंग बनाकर करते हैं वसूली
कुछ समय के लिए व्यापारियों को राहत मिली लेकिन, इनके बाद रंगदारी के धंधे को चीनू पंडित, संजीवा जीवा और सुनील राठी ने संभाल लिया। तीनों अपना अलग-अलग गैंग बनाकर व्यापारियों से गाहे-बगाहे वसूली करते हैं। जेल में होने के बावजूद इनके गुर्गे धमकी देकर रंगदारी वसूलने का धंधा जारी रखे हुए हैं।

इनका हुआ खात्मा
उदयराज सैनी वर्ष 2000 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद जितेंद्र भूरी और सुशील उदलहेलड़ी 2002 में एनकाउंटर में शिकार बने।

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ज्वालापुर के कपड़ा व्यापारी और सीमेंट व्यापारी को मारने के बाद लूट की सिलसिलेवार वारदात करने वाले गुलजार और पंचम चौहान को भी पुलिस ने 2000 में मुठभेड़ में मार गिरया। इसके अलावा विश्वास पंडित, राजबीर गिद्दावाली, सुनील खटका, अकबर मुल्ला, संदीप गिट्टी, एश्वर्या पाल भी पुलिस कार्रवाई में मारे गए।

राह बदली, तेवर नहीं
पुलिस कार्रवाई के बाद कई बदमाश ऐसे रहे जिन्होंने रंगदारी का धंधा छोड़ अलग राह चुन ली। इनमें नाजिम सलमानी, प्रताप पाल, सत्तार, नौशाद पठान, जसवंत आदि के नाम आते हैं।

इनमें से कई राजनीति में अपनी पैठ बनाने की जुगत में है तो कोई दूसरे धंधों में लगा है। अलग राह पकड़ने के बाद भी गाहे-बगाहे ये बदमाश अपने नाम के खौफ को भुनाते रहते हैं।
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