देहरादून में गिरफ्तार हुआ चोर ललित बैरवा (28) उर्फ अमित गुप्ता एमबीए में फेल, लेकिन चोरी में मास्टर है। इसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने सात चोरियों के खुलासे का दावा किया है।
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यह युवक हरिद्वार के होटल रहकर राजधानी देहरादून के बंद घरों में अकेले ही चोरी की वारदात को अंजाम देता था। उसका कोई साथी है न कोई मुखबिर। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर 5 लाख 87 हजार रुपए का माल बरामद किया है। चोरी के जेवर उसने ज्वेलर के पास गिरवी रखे थे।
ललित वह रेलवे स्टेशन, लाखेरी जिला बूंदी राजस्थान का रहने वाला है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय रौतेला ने बताया कि जांच में पता चला था कि कुछ चोरियों में केवल एक ही शख्स का हाथ है। आरोपी हरिद्वार से बस या ट्रेन से दून पहुंचता था और चोरी के बाद हरिद्वार लौट जाता था।
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आईएसबीटी पर उतरने के बाद ललित बैरवा ने नेहरू कालोनी और पटेलनगर में चोरियां की, जबकि रेलवे स्टेशन पर उतरा तो कोतवाली, रायपुर और राजपुर इलाके उसके निशाने पर रहे।
वह अपने साथ सिर्फ पेचकश लेकर चलता था और इसी से कुंडा उखाड़कर मकान में दाखिल होता था। एसएसपी अजय रौतेला ने बताया कि शहर में अभी कई और गैंग सक्रिय हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखता है ललित
ललित एक सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण गुप्ता नगर निगम कोटा में कमिश्नर रहे हैं। उसकी मां पेशे से डॉक्टर थीं।
लेकिन, ललित ने अपनी काबलियत चोरी में महारत हासिल करने में दिखाई। ललित 14 साल से इस धंधे में जमा हुआ है और कई बार जेल जा चुका है।
तीन बेटों में सबसे छोटा ललित घर में सबसे लाडला था। सुबोध कॉलेज जयपुर से बीकाम करने के बाद ललित ने ओम कोठारी मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट कोटा से बीबीए की पढ़ाई की।
इसके बाद एमबीए के लिए सिंबायोसिस इंस्टीट्यूट पुणे में दाखिला लिया। लेकिन, फेल होने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। ललित ने सबसे पहले वर्ष 2000 में टीवी की किट चुराई थी। इसके बाद कई और चोरियां की लेकिन पकड़ा गया।
दो साल जेल में रहने के बाद बाहर, लेकिन सुधरा नहीं। 2005 में वह फिर जेल गया। 2008 में चोरी की 13 मोटर साइकिलों के साथ वह पकड़ा गया। 2010 में वह फिर जेल गया।
जयपुर और राजस्थान में उसने चोरी 31 घटनाओं का अंजाम दिया। 2013 में जेल से छूटने के बाद वह गुड़गांव आ गया। यहां वैष्णवी इवेंट मैनेजमेंट के नाम से फाइनेंस कंपनी का ऑफिस खोला था।
लाखों की देनदारी होने के बाद इसी साल मार्च में भागकर हरिद्वार आ गया था। तब से वह हरिद्वार के एक होटल में रहकर दून में चोरियों को अंजाम दे रहा था।
मकान मालिक से हाथ मिलाकर लगा दी दौड़
ललित देहरादून के बसंत विहार के एक मकान में चोरी कर रही रहा था कि मकान मालिक पहुंच गया। मकान के अंदर मौजूद ललित को गेट खुलने की आवाज आई तो वह तुरंत बाहर आ गया।
मकान मालिक को सामने देख ललित घबराकर भागा नहीं। उसने पूरे सम्मान के साथ हेलो कहा और मकान मालिक से हाथ मिलाया। मकान मालिक ने आने का कारण पूछा तो ललित ने कहा कि वह बाबू जी से मिलने आया था।
मकान मालिक को यह सुनकर झटका लगा। सवाल किया कि यहां तो कोई बाबू नहीं रहते। अपनी पोल खुलती देख ललित ने मौके से दौड़ लगा दी। ललित का कहना है कि इसके अलावा 5-6 और मकानों में उसके हाथ कुछ नहीं लगा।
सर्राफ फंस गया ललित की अंग्रेजी में ललित को देखकर कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि वह एक शातिर चोर है। बेहद हैंडसम ललित फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलता है। पुलिस की मानें तो उसने देहरादून के ही धामावाला में एक सर्राफ के यहां चोरी के जेवर गिरवी रखे थे।
सर्राफ भी उसकी अंग्रेजी से काफी प्रभावित हुआ था। कुछ माल आरोपी ने गुड़गांव के एक सर्राफ के यहां गिरवी रखा था। एसएसपी ने बताया कि चोरी के जेवर बेचे नहीं गए थे, इसलिए सर्राफ के यहां रखे तमाम जेवर मिल गए हैं।
ललित को ले डूबा पुराना जुर्म
भले ही ललित शातिर तरीके से दून पुलिस को चकमा दे रहा था, लेकिन उसका एक पुराना जुर्म उसे हवालात पहुंचा दिया। एक मामले में दिल्ली पुलिस को उसकी तलाश थी। पुलिस को उसकी लोकेशन दून में मिली तो उसने दून पुलिस से संपर्क किया।
इस बीच पता चला कि कई चोरियों में सिर्फ एक ही शख्स शामिल था। लोगों की मदद से पुलिस ने इसका स्कैच तैयार कराया। इसी बीच दिल्ली पुलिस धोखाधड़ी के मामले में ललित को तलाशते यहां पहुंची।
ललित के मोबाइल नंबर की लोकेशन चोरी के घटनास्थलों के आसपास मिलती रही। बाद में पुलिस को हरिद्वार में एक ही जगह उसकी लोकेशन बार-बार मिली। मौका देखकर पुलिस ने छापा मारा और एक होटल के बाहर से उसे दबोच लिया।
बोला, मां की बीमारी से बदली जिंदगी ललित की मानें तो उसकी मां की बीमारी की वजह से उसकी जिंदगी बदल गई। पिता की मौत के बाद बीमार मां की जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई थी।
बीमारी में काफी रुपया लग गया। भाइयों ने उसका साथ नहीं दिया था। वर्ष 2003 में मां की मौत के बाद उसकी जिंदगी का मकसद बदल गया।
ललित ने दून की एयर होस्टेस से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2009 में वडोदरा में यह युवती हेयर होस्टेस का कोर्स कर रही थी।
इसी बीच ललित के उससे प्रेम संबंध हो गए थे। जनवरी 2010 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था। पत्नी के गर्भवती होने के बाद ललित को जयपुर पुलिस ने पकड़ लिया।
इसके बाद पत्नी ने उससे नाता तोड़ लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों के बीच तलाक का मुकदमा चल रहा है।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-rakeshk@mrt.amarujala.com और इस नंबर-9675501486 पर संपर्क कर सकते हैं।)