कस्टडी में रजनीश की मौत के बाद कटघरे में खड़ी ‘वर्दी’ को बचाने के लिए आपरेशन ‘मैनजमेंट’ शुरू कर दिया गया है।
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बिजनौर में पकड़ रखने वाले पुलिस के कई दिग्गजों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। करीबियों के सहारे पीड़ित परिवार तक कई ऑफर पहुंचाए गए हैं, लेकिन अभी बात न बनने के कारण मुहिम परवान नहीं चढ़ सकी है।
एक बार फिर दागदार हुई वर्दी
रणबीर एनकाउंटर से अब तक नहीं उबर पाई दून पुलिस के लिए रजनीश की मौत चक्रव्यूह से कम नहीं है। मौत की वजह कुछ भी हो, लेकिन वर्दी फिर दागदार हुई है।
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बचाव के लिए कानूनी पेज भले ही भर लिए गए हों, लेकिन पुलिस को आगे चलकर कानूनी चक्रव्यूह में फंसने का डर सता रहा है। यही वजह है कि पुलिस किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है।
मैनेजमेंट के मास्टर हैं ये खिलाड़ी
रजनीश की मौत के रूप में टूटी आफत से छुटकारा पाने के लिए पुलिस ने अपने मैनेजरों को मैदान में उतार दिया है। ये ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैनेजमेंट के मास्टर माने जाने जाते हैं।
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बिजनौर से उनका करीबी रिश्ता भी है। रात भर करीबियों के जरिए कई ऑफर दिए गए हैं। मध्यम वर्गीय रजनीश के परिवार का पहले कभी पुलिस से पाला नहीं पड़ा है।
एक तो रजनीश की मौत का दर्द और दूसरा अपराध का दाग परिजनों की जिंदगी में तूफान लेकर आया है। उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है। पुलिस उनकी इसी उलझन का फायदा उठाकर वर्दी को पाक साफ साबित करना चाहती है।
परिवार पर नहीं कोई दबाव
एसएसपी अजय रौतेला ने साफ किया कि पुलिस का रजनीश के परिजनों पर किसी तरह का दबाव नहीं है।
उनके हर आरोप की निष्पक्ष जांच कराने के लिए पुलिस कृतसंकल्प है। इसी वजह से दूसरे जिले के अधिकारी से जांच कराई जा रही है।
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मजिस्ट्रीयल जांच के बाद जिलाधिकारी ने जनपद न्यायाधीश से मामले की न्यायिक जांच कराने का भी अनुरोध किया है। डीएम बीबीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि पुलिस-प्रशासन का मकसद कुछ छिपाना नहीं है।
बताया कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पहले से ही प्रस्तावित धनराशि जल्द ही परिवार को दे दी जाएगी।