देहरादून में हुई नकरौंदा की डकैती और अंकित हत्याकांड ने पुलिस को चकरघिन्नी बनाकर रख दिया है। उत्तराखंड और वेस्ट यूपी के तमाम गिरोहों को खंगालने के बाद भी पुलिस खाली हाथ है।
अब तक की जांच यही इशारा कर रही है कि घटना में आपराधिक जनजातियों का हाथ है। लेकिन जिस तरीके से इसे अंजाम दिया गया, उससे पुलिस उलझ गई है।
घटना में सक्रिय अलग-अलग जनजाति गिरोहों से जुड़ी कुछ निशानियां मिल रही हैं। ऐसे में पुलिस तय नहीं कर पा रही है कि बावरिया, बंगाली रॉडी, बांग्लादेशी या पादरी में से किस गिरोह ने यह वारदात की है।
बांग्लादेशियों पर ज्यादा शक
नकरौंदा डकैती का ट्रेंड बांग्लादेशी ट्राइब से काफी मेल खाता है। इस जाति के अपराधी पेचकस की मदद से ग्रिल खोलकर घरों में दाखिल होते हैं। गिरोह के सदस्य तमंचे, डंडे, छुरे भी साथ लेकर चलते हैं और विरोध होने पर हत्या कर डालते हैं।
खाली प्लाट से लगे मकान और ऐसे मकान जिनके आंगन में कार पार्क हो उनकी पहली पसंद होते हैं। अधिकतर वारदात ये गिरोह रात तीन बजे के आसपास ही करता है। इस गिरोह के सदस्यों का ठिकाना दिल्ली है। यहीं से वे देशभर में डकैती करने जाते हैं।
बंगाली-रॉडी और पादरी भी हो सकते हैं
हिंदू-मुस्लिम बंगाली और रॉडी जनजाति के अपराधियों के वारदात करने का तरीका भी कुछ कुछ नकरौंदा डकैती जैसा होता है। ये अपराधी जघन्य हत्याओं से गुरेज नहीं करते।
नकरौंदा में एसएस थपलियाल के बेटे को मारा गया, जबकि थपलियाल, उनकी पत्नी, सास और किरायेदारनी को भी जमकर पीटा गया था। पहले ये लोग दरवाजे तोड़ देते थे, लेकिन अब ग्रिल खोलकर ही भीतर दाखिल होते हैं। वहीं, पादरी जाति के अपराधी भी प्रदेश में सक्रिय हैं। डेढ़ साल पूर्व रुड़की में इन लोगों ने डकैती और हत्या की थी।
बावरियों पर भी संदेह
बावरिया और छयमार जनजाति के अपराधी पूर्णिमा से पहले वारदात किया करते हैं। घटना की रात नौ सितंबर पूर्णिमा से पहली कृष्ण पक्ष की आखिरी रात थी। ये दोनों गिरोह लूटपाट के साथ परिवार के सभी सदस्यों को डंडों से जमकर पीटते हैं।
लेकिन, तमंचे का इस्तेमाल कम ही किया जाता है। ये गिरोह ग्रिल खोलते नहीं सीधे उखाड़ लेते हैं। इसके अलावा रात तीन बजे से पहले ही ये वारदात कर निकलते हैं।
कहीं उलझाने की कोशिश तो नहीं
सूत्रों की मानें तो वक्त के साथ जनजाति अपराधी गिरोह भी अपडेट हो गए हैं। इस बीच कुछ नए गैंग ऐसे भी बने हैं जिनमें कई जनजातियों के सदस्य शामिल हैं।
इसके अलावा कई बार एक जनजाति के गिरोह वारदात को इस तरह अंजाम देते हैं कि शक दूसरी जनजाति पर हो। अकसर इस तरीके से वे कानूनी शिकंजे से बचे रह जाते हैं।
नैनीताल से कुलदीप को बुलावा
नकरौंदा की डकैती और हत्या में नाकामी झेल रही दून पुलिस की मदद के लिए नैनीताल में तैनात इंस्पेक्टर कुलदीप असवाल को भी बुलाया गया है।
एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा के निर्देश पर असवाल को एक सप्ताह के लिए दून पुलिस से संबद्ध किया गया है। असवाल लंबे समय तक दून के विभिन्न थानों में तैनात रहे हैं।
नकरौंदा डकैती में पुलिस तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है। यही वजह है कि बडे़ पैमाने पर कार्रवाई के बाद भी खुलासे में देरी हो रही है। अब तक की जांच से यह तो साफ हो चुका है कि घटना में क्रिमिनल ट्राइब्स का ही हाथ है। वारदात का ट्रेंड वाकई चौंकाने वाला है। लेकिन जल्द खुलासा किया जाएगा।
- अजय सिंह, एसपी सिटी