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नशा मुक्ति के नाम पर चल रहा बड़ा फर्जीवाड़ा

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नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर फर्जीवाड़ा
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नशे से छुटकारा दिलाने के लिए राजधानी में बड़ी संख्या में नशा मुक्ति केंद्र अवैध रूप से चल रहे हैं। इन केंद्रों का न तो कहीं पंजीकरण है और न ही इनके पास कोई विशेषज्ञ हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई है। वहीं जिला प्रशासन भी अपने सर्वे में राजधानी के नशा मुक्ति केंद्रों में तमाम खामियों की बात स्वीकार कर रहा है।
हाईकोर्ट ने सोमवार को नशे के खिलाफ अहम आदेश दिया था। इसके तहत एक ओर जहां नशीले पदार्थों को प्रतिबंधित किया गया था, वहीं नारकोटिक्स सेल को भी कार्रवाई के आदेश दिए गए। इसका दूसरा पहलू है नशा मुक्ति केंद्र। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि राजधानी में केवल तीन नशा मुक्ति केंद्रों का पंजीकरण रजिस्ट्रार चिट फंड सोसायटी में है। बाकी इसके बावजूद बड़ी संख्या में राजधानी में संचालित नशा मुक्ति केंद्र अवैध तरीके से चल रहे हैं। इन केंद्रों में न तो कोई विशेषज्ञ हैं और न ही सुविधाएं। ऐसे नशा केंद्रों के बाबत शिकायत पर जनवरी में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दिए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम को इन केंद्रों में खामियां तो मिलीं, लेकिन कार्रवाई अबतक नहीं हुई।
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नशा छुड़ाने के 40 से 60 हजार रुपये
नशा मुक्ति केंद्र नशा छुड़ाने के नाम पर खूब चांदी काट रहे हैं। इलाज के नाम पर एक पीड़ित से 40 से 60 हजार रुपये वसूले जाते हैं। बदले में फर्श पर लेटाया जाता है। नशे से दूर रखने के लिए पीड़ित को एक-एक महीने तक कमरे में बंद रखा जाता है। एक पीड़ित ने बताया कि उन्हें नशा छुड़ाने के नाम पर जमकर पीटा गया। बमुश्किल वह बचकर बाहर निकले।
विवादों से पुराना नाता
नशा मुक्ति केंद्रों का विवादों से पुराना नाता रहा है। 5 नवंबर 2012 को देहरादून में ही एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि उसका भारी उत्पीड़न किया गया था। 12 अप्रैल 2013 को ऋषिकेश में नशा मुक्ति केंद्र संचालक व उसके साथियों ने एक युवक को इतना पीटा था कि उसकी मौत हो गई। बाद में आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।
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हमने जिलाधिकारी के आदेश के बाद नशा मुक्ति केंद्रों की जांच पड़ताल की थी, जिसमें काफी खामियां सामने आई थीं। इस पर कार्रवाई की जा रही है। रही बात फर्जी नशा मुक्ति केंद्रों की तो इसके लिए हमने टीम गठित की गई है। यह टीम जल्द ही सभी ऐसे नशा मुक्ति केंद्रों पर छापेमारी अभियान चलाकर कार्रवाई करेगी। गैर पंजीकृत नशा मुक्ति केंद्रों को हर हाल में बंद कर दिया जाएगा।
-डॉ. एसके गुप्ता, सीएमओ, देहरादून
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