ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
एसटीएफ दारोगा और उनकी टीम पर मुकदमा चलाने के एनडीपीएस कोर्ट के आदेशों के खिलाफ पुलिस हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन तथ्यों को छुपाया हुआ बताया गया है, वे सब विवेचना का हिस्सा बनाए जाने थे। अधिकारी इन आदेशों को नियम विरुद्ध मान रहे हैं।
बुधवार को एसटीएफ के दारोगा अमन चड्ढा और उनकी टीम ने एक चरस तस्करी के आरोप में प्रेम चौहान को पकड़ा था। मुकदमे के विवेचक प्रवेश रावत जब प्रेम चौहान को एनडीपीएस स्पेशल जज सुबीर कुमार की कोर्ट लेकर पहुंचे तो उसने वहां दारोगा अमन चड्ढा पर कई आरोप मढ़ दिए। बताया कि जिस समय चड्ढा ने उन्हें पकड़ा था, उस समय उसने असल तस्करों के बारे में उन्हें जानकारी दी थी। साथ ही जिसे वह देहरादून में चरस देने आया था, उसका नाम और फोन नंबर भी बताया था। चड्ढा ने उससे एक मोबाइल भी बरामद किया, मगर वह विवेचक को नहीं दिया।
आरोपी की इन्हीं बातों के आधार पर न्यायालय ने दारोगा चड्ढा के साथ ही उनकी टीम को जानबूझकर साक्ष्य छुपाने और असल आरोपियों को बचाने का आरोपी पाया। न्यायालय ने अमन चड्ढा और उनकी टीम को भी विवेचना में अभियुक्त के तौर पर शामिल करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने एसएसपी देहरादून को आदेश दिए थे कि जरूरत पड़ने पर अमन चड्ढा एवं उनकी टीम के सदस्यों को गिरफ्तार भी किया जाए। अब बुधवार को एसएसपी देहरादून निवेदिता कुकरेती ने कहा कि पुलिस कोर्ट के इन आदेशों के विरुद्ध हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी।