छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप से घिरे हरिद्वार जिले के पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर के जवाबों से कई राज खुलने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों ने घोटाले में एक मंत्री का नाम जोड़कर शंखधर की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। अब हाईकोर्ट ने अनुराग शंखधर को एक सप्ताह में पेश होने के आदेश दिए हैं। इसके बाद एसआईटी ने पहले से तैयार सवालों की सूची में फेरबदल शुरू कर दिया है।
एसआईटी की जांच में हरिद्वार जिले के कई निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकाें के खिलाफ कार्रवाई के बाद पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर और तीन सहायक समाज कल्याण अधिकारियाें को बयान के लिए बुलाया था। सहायक समाज कल्याण अधिकारी तो लगातार एसआईटी जांच में सहयोग करते रहे। एसआईटी ने भी इन्हें चार नोटिस दिए लेकिन पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी ने सामने नहीं आए। इसी बीच शंखधर गिरफ्तारी से स्टे लेने हाईकोर्ट पहुंच गए, जहां पर उन्हें राहत नहीं मिली।
एसआईटी ने इसके बाद इनके देहरादून और हरिद्वार स्थित आवास पर नोटिस चस्पा कराए। यही नहीं विभागीय अधिकारियाें को भी पत्र लिखा गया। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान शंखधर को राहत देने की बजाय एक सप्ताह में एसआईटी के सामने पेश होने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद एसआईटी ने पहले से तैयार सवालों की सूची में फेरबदल शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है शंखधर के जवाब से कई और खुलासे होने की उम्मीद है। घोटाले को लेकर विभागीय अधिकारियाें ने एक कैबिनेट मंत्री का नाम भी लिया था। ऐसे में यह दिलचस्प रहेगा कि मंत्री के हस्तक्षेप को लेकर शंखधर का क्या जवाब होगा?