ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। ओएनजीसी से सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की अग्निशमन इकाई हटाने की तैयारियां चल रहीं हैं। ओएनजीसी की ओर से इस इकाई को निष्क्रिय करार देते हुए अप्रैल तक बंद करने के लिए सीआईएसएफ मुख्यालय को पत्र लिख दिया है। कंपनी ने दावा किया है कि वे अपनी अग्निशमन इकाई को प्रभावी बना रहे हैं। इधर, सीआईएसएफ यूनिट हटाने की चर्चाएं शुरू होते ही स्थानीय लोगों में रोष छा गया है। लोगों का कहना है किसी अग्निकांड के समय कैंट और आसपास के क्षेत्रों में यह यूनिट पुलिस से भी पहले पहुंचती है।
ओएनजीसी मुख्यालय देहरादून में वर्ष-1986 से सीआईएसएफ की अग्निशमन इकाई काम कर रही है। वर्तमान में इसमें तीन फायर टेंडर (आग बुझाने की गाड़ियां) और 54 अधिकारी-कर्मचारी हैं। यह इकाई ओएनजीसी में होने वाले अग्निकांड में तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाती ही है, साथ ही आसपास के क्षेत्रों में भी पुलिस से पहले पहुंचकर अग्निकांड पर काबू पाती है। बचाव कार्यों में इसका खासा योगदान होता है। सूत्रों से मिली जानकारी के कंपनी समिति के सदस्यों का कहना है कि वे अपनी विभागीय फायर स्टेशन को मजबूत कर रहे हैं। इस स्टेशन को वह मार्च-2019 तक पूरा कर लेंगे। ऐसे में उसे अब सीआईएसएफ की इकाई की जरूरत नहीं है। सीआईएसएफ की इस यूनिट में दो बड़े फायर टेंडर और एक छोटा टेंडर है। इनमें से दो बड़े फायर टेंडर वर्ष-2003 में खरीदे थे। नियमों के अनुसार एक फायर टेंडर की सही से काम करने की उम्र दस साल ही होती है। लिहाजा अब ये पुराने हो चुके हैं। जबकि, छोटा फायर टेंडर साल 2013 में खरीदा गया था।