ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
बड़े पैमाने पर अवैध खनन का भंडाफोड़ होने के बावजूद क्रशर स्वामियों को अभयनदान मिल गया है। पिछले कुछ माह में अवैध खनन से लदी चंद भैसा बुग्गियां हत्थे चढ़ने भर पर ही क्रशर स्वामियों को मुकदमे झेलने पड़े थे लेकिन जिलाधिकारी के छापे के बाद अवैध खनन का खुलासा होने के बाद एक भी क्रशर स्वामी के खिलाफ केस तक दर्ज नहीं हुआ है। सभी की नजर इस बात पर लगी है कि क्या राजस्व प्रशासन इस मामले में मुकदमे दर्ज कराएगा या नहीं।
सोमवार को अवैध खनन की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी दीपक रावत को खुद उतरना पड़ा। जिलाधिकारी ने जब अवैध खनन की हकीकत अपनी आंखों से देखी तब वह अधीनस्थों पर नाराज भी हुए थे। अपने मातहतों को भी डीएम ने खरी खरी सुनाई। अवैध खनन की खरीद फरोख्त से लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर नौ क्रशर भी सीज किए गए थे। उम्मीद जताई जा रही थी कि तहसील प्रशासन क्रशर मालिकों के खिलाफ पूर्व की भांति मुकदमे भी दर्ज कराएगा। लेकिन एक भी क्रशर स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। जबकि पिछले कुछ समय के पन्ने पलटने पर साफ साफ दिखाई देता है कि करीब 12 क्रशर स्वामियों के खिलाफ अवैध खनन होने पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कुछ गिरफ्तारियां भी हुई थी। यह कार्रवाई कांस्टेबल, दारोगा स्तर से हुई लेकिन जिलाधिकारी की तरफ से रंगे हाथ अवैध खनन पकड़े जाने पर के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से इस तरह की कार्रवाई नहीं किया जाना कई सवाल उठा रहा है।
गंगा तट नया ठिकाना
हरिद्वार। गंगा तट अब क्रशिंग का नया ठिकाना बन रहा है। जिलाधिकारी दीपक रावत के छापे के दौरान भी कई क्रशर ऐसे सामने आए हैं, जो गंगा तट से सटे हुए थे। दरअसल, अब कई क्रशर स्वामी अपने नए क्रशर गंगा तट से सटाकर लगा रहे हैं। जिससे वह अवैध खनन खुलकर कर सकें और कोई रोकटोक न हो। साथ ही उन्हें ग्रामीणों का विरोध भी नहीं झेलना पड़ेगा। प्रशासन और पुलिस के अफसर भी दूर दराज होने के चलते इन क्षेत्रों में जाने की जहमत नहीं उठाते हैं। इसी का फायदा क्रशर स्वामी उठा रहे हैं। गंगा तट से ऐसे क्रशरों की संख्या मौजूदा समय में दस से पंद्रह के बीच है और लगातार बढ़ रही है।