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स्वरोजगार योजना में आवंटित ऋण मामले में मुकदमा दर्ज कराने का आरोप

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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प्रदेश के चर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की एसआईटी जांच अभी पूरी भी नहीं हुई कि प्रथम अपर सिविल जज (एसडी) के न्यायालय ने एक और सरकारी योजना वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्व: रोजगार योजना के तहत वर्ष 2003 में अपात्र लोगों को ऋण देने के मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश पुलिस को दिए हैं। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से बेरोजगारों की बजाय कई राजनीतिक रसूखदार और धनाढ्य लोगों को ऋण दिया गया।
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पर्यटन विकास विभाग की ओर से वर्ष 2003 में आवंटित ऋण में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने वर्ष 2011 में धारा 156 के अंतर्गत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर 19 जनवरी को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अपर सिविल जज (एसडी) हरिद्वार के न्यायालय ने रानीपुर कोतवाली पुलिस को आदेश दिया है कि संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करना सुनिश्चित किया जाए। अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, क्षेत्रीय पर्यटन विकास अधिकारी, लीड बैंक प्रबंधक, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, नाबार्ड और परिवहन विभाग को प्रतिवादी बनाया है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के आदेश पर इन सबके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। अधिवक्ता अरुण भदौरिया का आरोप है कि प्रदेश के बेरोजगारों के लिए शुरू की गई वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्व: रोजगार योजना में राजनीतिक रसूखदारों और धनाढ्य लोगों ने अधिकारियों से मिलकर करोड़ों का घोटाला किया है। इसमें एक विधायक के परिवार के लोग भी शामिल हैं और शहर के बड़े होटल व्यवसायी, दुकान वाले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ऋण योजना में मिलने वाली सब्सिडी को ठिकाने लगाने के लिए यह खेल खेला गया था। रानीपुर कोतवाली प्रभारी साधना त्यागी का कहना है कि अभी कोर्ट का आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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