सीसीएस यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री से पाई नौकरी
शिकायत थी कि रुद्रप्रयाग के दानकोट स्थित किमाणा राजकीय प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक विक्रम सिंह ने वर्ष 2005 में बीएड की फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाई है। सीबीसीआईडी से मिली जानकारी के मुताबिक, विक्रम सिंह के प्रमाण-पत्रों की जांच शुरुआत में बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर की जा रही थी। इस दौरान विक्रम सिंह ने खुद एक बंद लिफाफा बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में जमा कराया, जिसमें चौधरी चरण सिंह (सीसीएस) यूनिवर्सिटी की बीएड की अंक तालिका और डिग्री रखी थी। प्राथमिक जांच में ये फर्जी पाए गए तो इसकी शिकायत उन्होंने सीबीसीआईडी से की। इसके बाद सीबीसीआईडी ने इन प्रमाण-पत्रों को सत्यापित कराने के लिए सीसीएस यूनिवर्सिटी भेजा तो वहां से इनके फर्जी होने का प्रमाण मिला। दोबारा सत्यापन के लिए सीबीसीआईडी से एक विशेष व्यक्ति यूनिवर्सिटी भेजा गया। वहां गोपनीय विभाग में भी यह प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए।
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केस-2
प्रधानाचार्य की हाईस्कूल-इंटर की मार्कशीट, नाम दोनों फर्जी
खमानी सिंह निवासी औरंगाबाद, बिजनौर, यूपी 24 मई 1996 को अल्मोड़ा में बतौर सहायक शिक्षक भर्ती हुआ और कुछ वर्ष बाद प्रधानाचार्य बन गया। खमानी सिंह के संबंध में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण-पत्र फर्जी होने की शिकायत मिली थी। पता चला कि खमानी सिंह ने सार्वजनिक इंटर कॉलेज फीना (बिजनौर) से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट पास होना दर्शाया है। सीबीसीआईडी ने अक्तूबर 2010 में इंटर कॉलेज को खमानी सिंह के प्रमाण-पत्रों को सत्यापन के लिए भेजा था। गत मार्च में आई रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए। सीबीसीआईडी ने दोबारा जांच के लिए इन्हें माध्यमिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद भेजा। यहां पता चला कि खमानी सिंह का नाम खवानी सिंह है। यही नहीं उसने जिन अनुक्रमांक को मार्कशीट पर दर्शाया है, वह किसी और के हैं। मामला सामने आने के बाद ही खमानी (खवानी) सिंह फरार हो गया। उसके खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
एसआईटी जांच में दो और शिक्षकों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं। इनमें से एक शिक्षक रुद्रप्रयाग में तैनात है जबकि दूसरा अल्मोड़ा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाचार्य है। मामला सामने आने के बाद प्रधानाचार्य फरार हो गया है। दोनों मामलों में सीबीसीआईडी से शिकायत की गई थी। इसके बाद जांच और सत्यापन में दोनों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस आधार पर सीबीसीआईडी ने दोनों के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। वर्तमान में सीबीसीआईडी ऐसी करीब एक दर्जन शिकायतों की जांच कर रही है। जल्द ही कुछ और मामले भी सामने आने की संभावना है।
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दोनों शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की कई स्तर पर जांच कराई गई थी, जिसमें ये फर्जी पाए गए। खमानी सिंह फरार हो गया है। सीआईडी ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश की है। कई और मामलों की भी जांच की जा रही है। जल्द ही कई और खुलासे हो सकते हैं।
-श्वेता चौबे, एएसपी, सीआईडी
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अमर उजाला ने चलाया था अभियान
फर्जी प्रमाण-पत्रों के सहारे नौकरी पाने के मामले में पिछले साल अमर उजाला ने ‘फर्जी डिग्री, असली नौकरी’ नाम से अभियान की शुरुआत की थी। कई मामले सामने आने के बाद शासन ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन कर सीआईडी एएसपी श्वेता चौबे को इसकी कमान सौंपी थी। जांच में अब तक दर्जनों शिक्षकों के प्रमाण-पत्र नकली पाए जा चुके हैं। कई के खिलाफ विभिन्न जनपदों में आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं।