भविष्य में उत्तराखंड की बिगड़ी कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के बजाय राज्य सरकार सदन में चर्चा के दौरान अतीत में चली गई।
अपराध नियंत्रण पर जवाब देना था लेकिन पूरे समय विपक्ष को उनकी (भाजपा) सरकार में हुए अपराधों के आंकड़े दिखाकर इज्जत बचाने की निरर्थक कोशिश मौजूदा सरकार ने की। निरुत्तर हुई सरकार का रुख जब नहीं बदला तो विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन से वाक आउट किया।
जवाब देने के बजाय उखाड़े गड़े मुर्दे
महिलाओं के प्रति बढ़ने वाले अपराधों पर तो सरकार कोई जवाब नहीं दे सकी। शून्यकाल में नियम-58 के तहत प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चर्चा शुरू हुई तो जवाब देने के लिए पुलिस विभाग के अफसरों ने गृहमंत्री प्रीतम सिंह को ऐसा पाठ पढ़ाया कि सरकार सदन में जवाब देने के बजाय गड़े मुर्दे उखाड़ने लगी।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बढ़े अपराधों का आंकड़ा सदन में पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश की राजधानी में पिछले एक साल में 28 लूट, 115 गृह भेदन, 179 वाहन चोरी, 27 हत्या और 36 महिलाओं के अपहरण हुए हो वहां आम आदमी कैसे रह सकता हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने एक साल के जिलेवार आंकड़े पेश किए। खनन माफियाओं द्वारा पुलिस व प्रशासनिक अफसरों पर हमले, विधायक फुरकान के भाई के अपरहण का सुराग नहीं लगने व फेरूपुर में नाबालिग से रेप व हत्या जैसे मामले सदन में रख सरकार से जवाब मांगा।
भाई के अपहरण की बात तो स्वयं कांग्रेस विधायक फुरकान ने सदन में की। मदन कौशिक ने कहा कि तीन साल पहले जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो राज्य में कुल नौं हजार केस रजिस्टर्ड थे, लेकिन पिछले तीन सालों में इनकी संख्या बढ़कर 20 हजार हो गई।
उन्होंने कहा कि सूबे में अपराध नियंत्रण के लिए केवल हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर पर ही फोकस करना है, लेकिन इन दोनों जिलों में ध्वस्त कानून व्यवस्था के चलते तीन दर्जन उद्यमी पलायन कर चुके हैं।
लेकिन सदन में अजीबोगरीब स्थिति उस वक्त पैदा हुई जब गृहमंत्री प्रीतम सिंह ने विपक्ष का जवाब और अपराध नियंत्रण का समाधान बताने के बजाय 2007 से 2004 तक केअपराध के आंकड़े पेश कर यह दर्शाने की कोशिश की कि भाजपा के राज में सर्वाधिक अपराध हुआ।
कौशिक ने गृहमंत्री को टोकते हुए कहा कि क्या यहां कंपीटिशन हो रहा है। सरकार को अपराध नियंत्रण पर बात करनी चाहिए। लेकिन अफसर दीर्घा में बैठे पुलिस के हाकिम पर्ची भेजते रहे और गृहमंत्री बोलते गए।
नेता प्रतिपक्ष ने तो यहां तक कहा कि सही जवाब देने के बजाय गृहमंत्री एक अबूझ ग्रामीण महिला की तरह व्यवहार कर रहे है। जवाब नहीं आने पर विपक्ष ने सदन से वाक आउट किया तो सत्तापक्ष की जान में जान आई। क्योंकि सरकार के पास कोई जवाब नहीं था।